देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा यानी नीट में आने वाले दिनों में बहुत बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इस परीक्षा को कराने, इसकी सुरक्षा और पूरे इंतजामों को जांचने के लिए बनी संसदीय समिति ने सरकार के सामने एक नया प्रस्ताव रखा है। समिति का कहना है कि देश में डॉक्टर बनने, आयुष और नर्सिंग की पढ़ाई के लिए एक ही परीक्षा कराने के बजाय अब अलग-अलग परीक्षाएं आयोजित की जानी चाहिए

लाखों छात्रों का बोझ कम करने की कोशिश
संसदीय समिति की बैठक से जो जानकारी सामने आ रही है, उसके मुताबिक सदस्यों का मानना है कि मौजूदा व्यवस्था में एक ही परीक्षा होने की वजह से देश भर से लाखों-करोड़ों छात्र एक साथ शामिल होते हैं। इससे सेंटर्स पर भारी भीड़ उमड़ती है। अगर एमबीबीएस, आयुष और नर्सिंग के लिए अलग-अलग परीक्षाएं होंगी, तो किसी एक परीक्षा पर छात्रों की संख्या का बहुत ज्यादा दबाव नहीं रहेगा। इससे परीक्षा का इंतजाम संभालने में आसानी होगी और छात्रों का मानसिक तनाव भी कम होगा।
अलग परीक्षा कराने में क्या है पेंच
इस बड़े बदलाव को लागू करने के रास्ते में कुछ व्यावहारिक दिक्कतें भी हैं। परीक्षा कराने वाली एजेंसी के अधिकारियों ने समिति के सामने साफ किया है कि मौजूदा व्यवस्था के तहत अलग-अलग परीक्षाएं कराना इतना आसान नहीं है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि अभी इन तीनों ही कोर्स की काउंसलिंग और कॉलेज की सीटें नीट के नंबरों के आधार पर ही तय होती हैं। ऐसे में अचानक अलग परीक्षा कराने से पूरा ढांचा बदलना पड़ेगा।
एक ही दिन परीक्षा कराने के ढर्रे से मिल सकती है मुक्ति
संसदीय समिति ने परीक्षा को ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए इसे कई चरणों में कराने का विकल्प भी सुझाया है। समिति के अनुसार, देश के अलग-अलग राज्यों और इलाकों में परीक्षा को अलग-अलग तारीखों पर कराया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक, सदस्यों का मानना है कि पूरे देश में एक ही दिन इतनी बड़ी परीक्षा कराने से सुरक्षा और इंतजामों को लेकर कई तरह की चुनौतियां खड़ी होती हैं। अगर परीक्षा टुकड़ों में या अलग-अलग चरणों में होगी, तो सुरक्षा को पूरी तरह पुख्ता किया जा सकेगा।
गड़बड़ी रोकने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम
बैठक के दौरान हाल ही में दोबारा आयोजित की गई नीट परीक्षा को सही तरीके से कराने के लिए समिति ने परीक्षा एजेंसी की तारीफ की। इस मौके पर अधिकारियों ने भविष्य में पेपर लीक और गड़बड़ी जैसी घटनाओं को रोकने के लिए किए गए कड़े उपायों की जानकारी दी। एजेंसी ने बताया कि अब सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप पर चौबीसों घंटे कड़ी नजर रखी जा रही है। इसमें टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म की निगरानी बढ़ाना और प्रश्नपत्र की सुरक्षा में बड़े बदलाव करना शामिल है। समिति के अध्यक्ष ने इन कदमों को परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में सही कदम बताया है।
कंप्यूटर पर परीक्षा कराने को लेकर भी हुई चर्चा
संसदीय समिति की इस बैठक में नीट को भविष्य में पेन-पेपर के पारंपरिक तरीके से हटाकर कंप्यूटर आधारित परीक्षा के रूप में कराने पर भी चर्चा हुई। हालांकि, समिति ने इस पर बेहद सतर्क रुख अपनाया है। समिति ने साफ किया है कि परीक्षा को कंप्यूटर मोड पर ले जाने का फैसला तभी किया जाना चाहिए, जब पूरे देश में, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में इसके लिए जरूरी सुविधाएं और तकनीकी तैयारियां पूरी हो जाएं। समिति का मुख्य उद्देश्य यह है कि किसी भी नए बदलाव के कारण देश के किसी भी छात्र को सुविधाओं की कमी की वजह से नुकसान न उठाना पड़े और सबको बराबरी का मौका मिले।