तत्कालीन तहसीलदार व पटवारी की मिली भगत कर शासकीय जमीन का किया बंदर बांट
जिला कलेक्टर से शिकायत, ग्राम पंचायत रगदा में सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर कर फर्जी प्रविष्टि कराने का सनसनीखेज मामला आया सामने।
सूरजपुर / भैयाथान एक तरफ जहां सरकार ग्रामीण विकास के लिए मनरेगा और अमृत सरोवर जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के तहत करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है, वहीं दूसरी तरफ भू-माफिया और राजस्व विभाग के कुछ भ्रष्ट कर्मचारियों की मिलीभगत से सरकारी जमीनों पर धड़ल्ले से डाका डाला जा रहा है।
ऐसा ही एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला जिला सूरजपुर के ग्राम पंचायत रगदा से सामने आया है, जहां सरकारी भूमि पर बकायदा सरकारी योजनाओं का काम होने के बाद भी तीन भाइयों ने कथित रूप से फर्जी पट्टा तैयार कर जमीन को अपने नाम दर्ज करा लिया।
स्थानीय ग्रामीणों व दस्तावेजों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत रगदा में स्थित शासकीय भूमि खसरा नंबर 1810/3, 1809/2, 1810/2, 1809/1 और 1809/3 (कुल रकबा क्रमशः 0.20, 0.06, 0.06, 0.34, 0.48 हेक्टेयर) पर शासन द्वारा व्यापक विकास कार्य कराए गए थे। इस सरकारी जमीन पर मनरेगा योजना के तहत पूर्व में अमृत सरोवर तालाब निर्माण सहित कई अन्य महत्वपूर्ण शासकीय कार्य संपन्न हो चुके हैं।
चूंकि यह भूमि छत्तीसगढ़ शासन के मद की है, इसलिए इस पर सार्वजनिक विकास कार्य कराए गए थे। लेकिन असली खेल साल 2023 में शुरू हुआ।
अमृत सरोवर वाली जमीन पर ऑनलाइन नक्शा सुधारा, कर दिया फर्जी इन्द्राज
ग्रामीणों की शिकायत के मुताबिक, ग्राम पंचायत रगदा के ही निवासी तीन भाइयों जिनमें शिवराम, समयलाल और शिवदास पिता स्वर्गीय दादूराम, जाति अहीर ने मिलकर एक बड़ी साजिश को अंजाम दिया। आरोप है कि इन तीनों ने कथित रूप से फर्जीवाड़ा करते हुए, राजस्व विभाग के अधिकारियों / कर्मचारियों से मिलीभगत की और ऑनलाइन नक्शे तथा सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर करवा लिया। इसके बाद इस कीमती सरकारी जमीन पर अपना नाम दर्ज (फर्जी इन्द्राज) करा लिया।
अब ऐसे में एक बड़ा सवाल यह बनता है कि जब जमीन सरकारी थी और उस पर शासन के पैसों से तालाब और मनरेगा के काम चल रहे थे, तो अचानक राजस्व विभाग के दस्तावेजों में इन निजी व्यक्तियों का नाम कहाँ से और कैसे आ गया
ग्राम पंचायत ने की कलेक्टर से शिकायत जांच की मांग
इस पूरे फर्जीवाड़े के उजागर होने के बाद ग्रामीण और ग्राम पंचायत स्तब्ध हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर महोदय, सूरजपुर को एक औपचारिक आवेदन सौंपकर इस फर्जी पट्टे और प्रविष्टि को तत्काल निरस्त करने की मांग की गई है।
पंचायत का कहना है कि यह सीधे तौर पर शासकीय संपत्ति को हड़पने का मामला है, जिसकी उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच होना बेहद आवश्यक है ताकि इस सिंडिकेट में शामिल दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो सके और सरकारी संपत्ति को खुर्द-बुर्द होने से बचाया जा सके। अब देखना यह है कि प्रशासन इस तीखी शिकायत पर कितनी तेजी से एक्शन लेता है।
सरकारी मद की कीमती जमीन का फर्जी दस्तावेज और ऑनलाइन नक्शा सुधार कर कराया गया फर्जी नामकरण।
सरकारी कार्य प्रभावित जिस जमीन पर अमृत सरोवर तालाब और मनरेगा के काम हुए, उसे ही निजी बताकर हड़पने की कोशिश।
मांग,, कलेक्टर से निष्पक्ष जांच और फर्जी प्रविष्टि को तुरंत निरस्त करने की गुहार।