गोबरी नदी पर बना रपटा पुल बना राहगीरों के लिए मुसीबत,, जनपद सदस्य राजू कुमार गुप्ता ने कलेक्टर को पत्र लिख खोली विभाग की पोल
सूरजपुर / विकास के नाम पर सरकारी विभागों की लापरवाही और कछुआ चाल का एक और बड़ा नमूना जनपद पंचायत भैयाथान के गोबरी नदी पर देखने को मिल रहा है। क्षेत्र के ग्रामीणों और राहगीरों की सुविधा के लिए गोबरी नदी पर लगभग 15-16 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च करके रपटा पुल तो खड़ा कर दिया गया है, लेकिन विभाग की अदूरदर्शिता के कारण यह पुल आज पूरी तरह से औचित्यहीन और सफेद हाथी साबित हो रहा है।

पुल तैयार, पर दोनों तरफ 300 मीटर रास्ता ही गायब!
हैरानी की बात यह है कि नदी पर रपटा पुल बनकर पूरी तरह तैयार है, लेकिन इसके दोनों तरफ विभाग द्वारा लगभग 300 मीटर का एप्रोच मार्ग पहुंच मार्ग बनाया ही नहीं गया
नतीजा यह है कि पुल होने के बावजूद लोगों को जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। एप्रोच रोड न होने के कारण आए दिन राहगीर, महिलाएं और मासूम स्कूली बच्चे यहां गिरकर चोटिल हो रहे हैं।
जनता परेशान,, समय और धन दोनों की हो रही बर्बादी
इस घोर लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए जनपद पंचायत भैयाथान क्षेत्र क्र. 07 के जनपद सदस्य व सहकारिता एवं उद्योग विकास विभाग के सभापति राजू कुमार गुप्ता ने जिला कलेक्टर महोदया को एक तीखा पत्र सौंपकर व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
पुल का निर्माण जनसुविधा के लिए किया गया था, लेकिन पहुंच मार्ग के अभाव में इसका कोई लाभ क्षेत्रवासियों को नहीं मिल रहा है। वाहन चालकों, विद्यार्थियों, किसानों और आम नागरिकों को लंबी दूरी तय कर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा है, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है।”
राजू कुमार गुप्ता, सभापति, सहकारिता एवं उद्योग विकास विभाग
बारिश में और गहराएगा संकट ग्रामीणों में आक्रोश
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने आधे-अधूरे मन से काम करके छोड़ दिया है। वर्तमान में वर्षा ऋतु शुरू हो चुकी है, ऐसे में यदि शीघ्र ही इस 300 मीटर के एप्रोच मार्ग का निर्माण नहीं कराया गया, तो स्थिति बेहद गंभीर और जानलेवा हो सकती है।
कलेक्टर से त्वरित कार्रवाई की मांग
सभापति राजू कुमार गुप्ता ने जनहित को सर्वोपरि रखते हुए जिला कलेक्टर से मांग की है कि संबंधित विभाग को तत्काल कड़े निर्देश जारी किए जाएं और गोबरी नदी पर निर्मित इस स्थायी रपटा के दोनों ओर जल्द से जल्द एप्रोच मार्ग का निर्माण कराया जाए, ताकि जनता को इस बड़ी मुसीबत से निजात मिल सके।
इस गंभीर शिकायत के बाद प्रशासन की कुंभकर्णी नींद टूटती है या ग्रामीण इस मानसून में भी इसी तरह नरकीय जीवन जीने को मजबूर रहेंगे।

