भुवनेश्वर। ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच महानदी के पानी को लेकर बरसों पुराना विवाद अब सुलझने की कगार पर पहुंच गया है। भुवनेश्वर से आ रही खबरों के मुताबिक महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल आज इस मामले पर एक बेहद जरूरी सुनवाई करने जा रहा है। इस सुनवाई की सबसे खास बात यह है कि दोनों राज्य अपनी कानूनी और तकनीकी टीमों की आपसी बातचीत का पूरा ब्योरा यानी प्रोग्रेस रिपोर्ट ट्रिब्यूनल के सामने रखेंगे।
पर्दे के पीछे की बातचीत लाई रंग
अंदर की बात यह है कि दोनों राज्यों के बीच पिछले कुछ समय से पर्दे के पीछे जो बातचीत चल रही थी, वह काफी हद तक सफल रही है। ओडिशा और छत्तीसगढ़ कई पेचीदा मुद्दों पर एक-दूसरे से सहमत हो गए हैं। अब आज की सुनवाई में ट्रिब्यूनल का पूरा ध्यान सिर्फ उन बचे-कुचे मुद्दों पर रहेगा जहां अभी भी थोड़ी बहुत असहमति या खींचतान बाकी है। इस पूरी बातचीत के दौरान केंद्रीय जल आयोग के अफसरों के भी मौजूद रहने की उम्मीद है ताकि तकनीकी बारीकियों को बेहतर तरीके से संभाला जा सके।
क्या इस बार बातचीत से निकलेगा रास्ता
राहत की बात यह है कि इस बार दोनों ही सरकारें इस जिद में नहीं हैं कि बात सिर्फ उनकी ही मानी जाए। ओडिशा और छत्तीसगढ़, दोनों ही तरफ से इस बात की पूरी कोशिश की जा रही है कि इस विवाद को बिना किसी कड़वाहट के आपस में बैठकर और शांति से सुलझा लिया जाए। यही वजह है कि आज की इस सुनवाई को एक बहुत ही सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि इससे एक ऐसा स्थायी समाधान निकलेगा जो दोनों राज्यों के लोगों के हक में हो।
जानिए आखिर क्या है पूरा मामला
महानदी के पानी के बंटवारे, उस पर बनने वाले बांधों और पानी के इस्तेमाल को लेकर दोनों राज्यों के बीच सालों से तकरार चल रही है। जब आपसी बातचीत से बात नहीं बनी, तो केंद्र सरकार ने इस विवाद को कानूनी रूप से सुलझाने के लिए एक ट्रिब्यूनल यानी विशेष अदालत का गठन किया था। महानदी सिर्फ एक नदी नहीं है बल्कि दोनों ही राज्यों के लाखों किसानों और आम लोगों की जिंदगी का सहारा है। ऐसे में आज होने वाली यह सुनवाई दोनों राज्यों के भविष्य और उनकी पानी की सुरक्षा के लिए बहुत मायने रखती है।