सक्ती में रेत माफियाओं का खुला आतंक, मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश बेकार, पत्रकार को कुचलने की कोशिश


सक्ती। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के अवैध रेत खनन, परिवहन और भंडारण पर जीरो टॉलरेंस की नीति और सख्त दिशा-निर्देशों के बावजूद सक्ती जिले में रेत माफियाओं का राज चल रहा है। प्रशासन और खनिज विभाग की मिलीभगत से माफिया इतने बुलंदहौसले हो चुके हैं कि अब वे पत्रकारों को दिन-दहाड़े हाईवे पर कुचल डालने की धमकी देते हुए हमला करने से भी नहीं हिचकिचा रहे।


सक्ती नगर के वार्ड क्रमांक 1 के भीड़भाड़ वाले इलाके में यह घटना हुई। जब एक पत्रकार ने अवैध रेत से लदे हाईवा के बारे में जानकारी पूछी तो माफिया ने खुलेआम धमकी दी- “रोकोगे तो कुचल दूंगा!” और फिर हाईवे को तेज रफ्तार से मोड़कर पत्रकार को कुचलने की कोशिश की। पूरा हादसा सीसीटीवी में कैद है, जिसमें माफिया की बेरहमी साफ दिख रही है। यह कोई पहली घटना नहीं है। प्रतिदिन सुबह 4 बजे से 6 बजे तक कलेक्टर कार्यालय, टोल प्लाजा और थाना परिसर के सामने से रेत भरे हाईवे नगर के बीचों-बीच घुस रहे हैं। 15 जून से 15 अक्टूबर तक रेत खनन-परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद यह धड़ल्ले से चल रहा है। बार-बार शिकायत करने के बावजूद खनिज विभाग के अधिकारी कुंभकर्ण की नींद सोए हुए हैं। फोन तक नहीं उठाते।


स्थानीय सूत्रों का आरोप है कि हाईवा संचालक खुलकर कह रहे हैं- “हम खनिज विभाग और संबंधित अधिकारियों को पैसा देते हैं, तभी तो नगर के अंदर घुस पाते हैं।” अगर नगर के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाएं तो अवैध परिवहन के सबूत मिल जाएंगे। अवैध डंपिंग भी नगर के कई इलाकों में खुलेआम हो रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने खनिज नियमों में भारी संशोधन कर जुर्माने बढ़ाए, वाहन जब्ती के लिए लाखों रुपये की सिक्योरिटी अनिवार्य की और अधिकारियों की जवाबदेही तय की। ड्रोन व उड़नदस्ते से निगरानी का आदेश दिया। फिर भी सक्ती में सब कुछ ठप्प है। जिला कलेक्टर और खनिज अधिकारी सीधे जिम्मेदार हैं, लेकिन कार्रवाई शून्य। यह लापरवाही खतरनाक है।


सूरजपुर में रेत को लेकर हो चुकी हत्याएं और जांजगीर-चांपा के करही में गोली मारकर युवक की हत्या अभी ताजा है। अगर सक्ती में तुरंत सख्त एक्शन नहीं लिया गया तो यहां भी बड़ी घटना हो सकती है। प्रशासन अब भी चुप है तो सवाल उठना लाजमी है- क्या मुख्यमंत्री के निर्देश जिले के अधिकारियों तक पहुंच ही नहीं रहे? या फिर कुछ और गठजोड़ है? रेत माफियाओं का यह खुला आतंक और पत्रकार पर हमला पूरे सुशासन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के दावों पर सवालिया निशान लगा रहा है। अब देखना होगा कि सक्ती प्रशासन और खनिज विभाग इस सीसीटीवी सबूत के बाद भी आंखें मूंदे रखता है या आखिरकार माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई का दिखावा भी कर लेता है।

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