रसोई घर को हमारे सनातन धर्म और वास्तु शास्त्र में सबसे पवित्र जगह का दर्जा दिया गया है। इसका सीधा असर हमारे स्वास्थ्य, मानसिक शांति और घर की बरकत से होता है। अक्सर देखा जाता है कि घरों में लोग परिवार के सदस्यों के हिसाब से नाप-तोल कर ही रोटियां बनाते हैं। लेकिन ज्योतिष और वास्तु विज्ञान के अनुसार रोटियां गिनकर बनाना परिवार के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हो सकता है। रसोई की यह छोटी सी आदत घर की सुख-समृद्धि और आर्थिक स्थिति पर बहुत भारी पड़ सकती है।

मां अन्नपूर्णा हो जाती हैं नाराज, कुंडली में बढ़ते हैं ग्रह दोष
हिंदू मान्यताओं में भोजन को भगवान का रूप और रसोई को मां अन्नपूर्णा का वास माना जाता है। जब हम रोटियों को उंगलियों पर गिनकर सीमित मात्रा में बांध देते हैं, तो इससे मां अन्नपूर्णा और धन की देवी लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं। इससे घर में आने वाला पैसा रुक जाता है और बरकत खत्म होने लगती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गिनकर रोटियां बनाने से कुंडली में राहु और केतु का बुरा असर भी शुरू हो जाता है। राहु का सीधा संबंध दिमागी तनाव से है और केतु जीवन में अचानक परेशानियां खड़ी करता है। इस वजह से परिवार के लोगों में बिना वजह झगड़े और मतभेद होने लगते हैं।
सेहत पर पड़ता है बुरा असर और मेहमानों का होता है अनादर
वास्तु के जानकारों का कहना है कि नाप-तोल कर बनाई गई रोटियां खाने से सेहत से जुड़ी दिक्कतें भी शुरू हो जाती हैं। ऐसी रोटियां शरीर को पूरा पोषण नहीं देतीं और घर का कोई न कोई सदस्य लगातार बीमार रहने लगता है। इसके अलावा हमारी संस्कृति में मेहमान को भगवान का रूप माना गया है। अगर घर में हमेशा फिक्स रोटियां बनेंगी, तो अचानक किसी के आने पर भोजन कम पड़ जाएगा। किसी आए हुए भूखे व्यक्ति को भोजन न दे पाना सबसे बड़ा दोष माना जाता है, जिससे मां लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं।
सुख-समृद्धि के लिए अपनाएं रसोई के यह जरूरी नियम
इस दोष से बचने के लिए हमेशा चार से पांच रोटियां ज्यादा बनानी चाहिए। तवे पर बनने वाली पहली रोटी हमेशा गाय के लिए निकालनी चाहिए। इस पहली रोटी पर थोड़ा सा घी और गुड़ रखकर गाय को खिलाने से सभी देवी-देवताओं की कृपा मिलती है। वहीं रसोई में बनने वाली सबसे आखिरी रोटी हमेशा कुत्ते के लिए होनी चाहिए। कुत्ते को नियमित रोटी खिलाने से शनि, राहु और केतु जैसे भारी ग्रहों के बुरे प्रभाव खत्म हो जाते हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है।