छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए भीषण गर्मी और उमस के बीच आखिरकार एक बड़ी राहत की खबर आ गई है। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार मानसून ने प्रदेश में दस्तक दे दी है। मौसम विभाग ने सोमवार 22 जून को बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा जिले से दक्षिण-पश्चिम मानसून के छत्तीसगढ़ में प्रवेश करने की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। मानसून के आते ही प्रदेश के कई हिस्सों में बादलों का डेरा जम गया है और ठंडी हवाएं चलने लगी हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले 24 से 48 घंटों के भीतर राज्य के बड़े हिस्से में बारिश की गतिविधियां तेजी से बढ़ेंगी, जिससे पारा काफी नीचे गिर जाएगा।
मौसम विभाग ने जारी किया भारी बारिश का अलर्ट
मानसून के सक्रिय होते ही मौसम विभाग ने प्रदेश के कई जिलों के लिए येलो और ऑरेंज अलर्ट (orange alert) जारी कर दिया है। दोपहर में जारी किए गए ताजा बुलेटिन के अनुसार, अगले कुछ घंटों के लिए राज्य के अधिकांश हिस्सों में मौसम काफी अस्थिर रहेगा। धमतरी, बालोद, गरियाबंद, महासमुंद, रायपुर, बलौदा बाजार, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, बिलासपुर, कोरबा, जशपुर, दुर्ग, बेमेतरा, मुंगेली, सरगुजा और सूरजपुर सहित 16 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन इलाकों में बादलों की गड़गड़ाहट और बिजली चमकने के साथ ही तेज आंधी चलने की आशंका है, जहां हवा की रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।
इन जिलों में भी आंधी-तूफान की चेतावनी
इसके साथ ही सुकमा, बीजापुर, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव, कांकेर, राजनांदगांव, कबीरधाम, कवर्धा, कोरिया और बलरामपुर समेत कई अन्य जिलों के लिए येलो अलर्ट (yellow alert) जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में भी गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, मानसून की रेखा इस वक्त पुणे, निजामाबाद और दंतेवाड़ा से होते हुए गुजर रही है, जो आने वाले दो दिनों में पूरे प्रदेश को अपनी चपेट में ले लेगी।
किसानों के चेहरे खिले, खेती-किसानी में आएगी तेजी
मानसून के इस सही समय पर आगमन से सबसे ज्यादा खुशी प्रदेश के अन्नदाताओं यानी किसानों के चेहरे पर दिखाई दे रही है। जून का महीना आधा बीतने के बाद किसान पानी के लिए परेशान थे, लेकिन अब खेतों में रौनक लौटने वाली है। इस मानसूनी बारिश से खरीफ फसलों की बुवाई (kharif crops sowing) के लिए खेत पूरी तरह तैयार हो जाएंगे। कृषि जानकारों का कहना है कि यह बारिश धान की नर्सरी तैयार करने और अन्य फसलों की बोनी के लिए अमृत के समान है। आम लोगों को भी अब झुलसाने वाली गर्मी से पूरी तरह निजात मिल जाएगी।