कृष्ण कुमार सिकंदर, रायपुर। मुख्यमंत्री निवास में बुधवार देर रात हुई एक लंबी और गोपनीय बैठक ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल मचा दी है। रात करीब नौ बजे शुरू हुई यह बैठक तड़के दो बजे के बाद समाप्त हुई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई इस मैराथन बैठक में प्रदेश सरकार के लगभग सभी मंत्री मौजूद रहे। भाजपा संगठन की ओर से प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय की मौजूदगी ने बैठक के राजनीतिक महत्व को और बढ़ा दिया।
सूत्रों के मुताबिक बैठक महज प्रशासनिक समीक्षा तक सीमित नहीं थी। मंत्रियों के कामकाज, संगठन से तालमेल और प्रभार वाले जिलों में उनकी सक्रियता को लेकर गंभीर चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि कुछ मंत्रियों के प्रदर्शन पर संगठन ने नाराजगी जताई है। कार्यकर्ताओं की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद मुख्यमंत्री ने भी स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार और संगठन दोनों की अपेक्षाओं पर खरा उतरना होगा।
सूत्रों का दावा है कि बैठक के दौरान कुछ मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड पर सवाल उठाए गए। संगठन की ओर से यह फीडबैक सामने आया कि कई मंत्री अपने प्रभार वाले जिलों में नियमित दौरे नहीं कर रहे हैं। कार्यकर्ताओं को समय नहीं मिल रहा है और स्थानीय स्तर पर संवाद की कमी महसूस की जा रही है। कुछ मामलों में अवैध कारोबार से जुड़े लोगों के साथ नजदीकियों और प्रशासनिक स्तर पर ढिलाई की शिकायतें भी सामने आई हैं।
बताया जाता है कि मुख्यमंत्री ने मंत्रियों से दो टूक कहा कि सरकार के कार्यकाल का आधे से ज्यादा समय गुजर चुका है और अब प्रदर्शन के आधार पर ही मूल्यांकन होगा। बैठक में यह संदेश दिया गया कि जिन मंत्रियों की कार्यशैली में सुधार नहीं दिखाई देगा, उन्हें भविष्य में राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। सूत्र बताते हैं कि आगामी एक जुलाई को विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने वाला है। मुख्यमंत्री आवास पर देर रात हुई बैठक में मानसून सत्र को देखते हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने सभी मंत्रियों को टिप्स दिए कि कैसे अपने-अपने विभागों की सत्र के दौरान पूछे जाने प्रश्नों की तैयारी बेहतर तरीके से करें। साथ ही प्रश्न के जवाब में मिले उत्तर की हकीकत खुद मौके पर जाकर देखें या मिली जानकारी के सत्यता की पुष्टि करें। अक्सर ये होता है कि समस्या का समाधान किस स्तर पर रूका है, इस मामले की जानकारी मंत्रियों को नहीं होती है।
दरअसल, बैठक से ठीक पहले भाजपा संगठन स्तर पर महत्वपूर्ण मंथन हुआ था। 18 जून को क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय ने प्रदेश के महामंत्रियों की बैठक ली थी। इस बैठक में कई पदाधिकारियों ने मंत्रियों के व्यवहार और कार्यशैली को लेकर नाराजगी जाहिर की थी। शिकायत थी कि कई मंत्री संगठन पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के फोन तक नहीं उठाते, जिससे जमीनी स्तर पर असंतोष बढ़ रहा है।
इसी फीडबैक के बाद मुख्यमंत्री निवास में मंत्रियों की विशेष बैठक बुलाई गई। दिलचस्प बात यह रही कि मंत्रियों को भेजे गए संदेश में केवल बैठक का समय और स्थान बताया गया था। एजेंडा गोपनीय रखा गया था। यही कारण रहा कि बैठक शुरू होने से पहले ही राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। हालांकि बैठक के बाद सरकार की ओर से किसी भी तरह के संकट या फेरबदल की संभावना से इनकार किया गया।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इसे तीन महीने में होने वाली नियमित समीक्षा बैठक बताया। उन्होंने कहा कि प्रभार वाले जिलों के विकास कार्यों, प्रशासनिक व्यवस्थाओं और जनहित के मुद्दों पर चर्चा की गई। वहीं उपमुख्यमंत्री अरुण साव और मंत्री रामविचार नेताम ने भी बैठक को सामान्य बताते हुए राजनीतिक अटकलों को खारिज किया, लेकिन पांच घंटे तक चली इस बैठक ने कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। खासकर ऐसे समय में जब भाजपा सरकार अपने ढाई साल के कार्यकाल की ओर बढ़ रही है और संगठन आगामी राजनीतिक चुनौतियों की तैयारी में जुटा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा मंत्रियों को जवाबदेह बनाने के लिए यह बैठक अहम संकेत छोड़ गई है।
बैठक के दौरान कोरिया जिले में रेत खनन विवाद से जुड़े भाजपा नेता की हत्या का मामला भी चर्चा में रहा। हालिया घटना के बाद अवैध खनन, रेत कारोबार और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर सरकार की रणनीति को लेकर भी मंत्रियों से चर्चा की गई। सूत्रों के अनुसार अवैध गतिविधियों पर सख्ती बढ़ाने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री निवास में हुई इस देर रात की बैठक को लेकर भले ही सरकार इसे नियमित समीक्षा बता रही हो, लेकिन सत्ता और संगठन के भीतर चल रही हलचल ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि आने वाले महीनों में सरकार के भीतर कुछ बड़े राजनीतिक फैसले देखने को मिल सकते हैं।