सुबह सोकर उठते ही शरीर में क्यों आ जाती है जकड़न? कहीं ये किसी गंभीर बीमारी का इशारा तो नहीं?

सुबह सोकर उठते ही हाथ-पैरों और जोड़ों में होने वाली भारी अकड़न को मेडिकल साइंस में ‘मॉर्निंग स्टिफनेस’ (Morning Stiffness) कहा जाता है। अक्सर लोग इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह शरीर के भीतर पनप रही हड्डियों या जोड़ों की किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकता है। जानिए आखिर सुबह के वक्त ही क्यों जकड़ जाते हैं शरीर के जोड़ और क्या हैं इसके पीछे के वैज्ञानिक कारण।

जोड़ों का लुब्रिकेंट सूखना है मुख्य वजह
बीएलके मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के सीनियर डायरेक्टर (ज्वॉइंट रिप्लेसमेंट प्रोग्राम) डॉ. ईश्वर बोहरा के अनुसार, हमारे जोड़ों को सुचारू रूप से चलाने के लिए उनके बीच एक गाढ़ा तरल पदार्थ होता है, जिसे ‘साइनोवियल फ्लूइड’ (Synovial Fluid) कहते हैं। रात में जब हमारा शरीर लंबे समय तक स्थिर रहता है, तो कार्टिलेज इस फ्लूइड को सोख लेता है। इसके चलते सुबह उठने पर जोड़ों में लुब्रिकेशन (चिकनाई) कम हो जाती है और अकड़न महसूस होती है। हालांकि, थोड़ा चलने-फिरने पर यह धीरे-धीरे सामान्य होने लगता है।

आर्थराइटिस का शुरुआती अलार्म
मॉर्निंग स्टिफनेस के बने रहने का समय यह तय करता है कि समस्या कितनी गंभीर है:

ऑस्टियोआर्थराइटिस: मेडिकल जर्नल ‘द लैंसेट’ की रिपोर्ट बताती है कि भारत में करोड़ों लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं, जिसमें जोड़ों की कार्टिलेज घिस जाती है। इसमें सुबह की अकड़न आमतौर पर 30 मिनट से कम समय के लिए रहती है।

रुमेटाइड आर्थराइटिस: यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम ही खुद के जोड़ों को नुकसान पहुंचाने लगता है। अगर सुबह की जकड़न 1 घंटे से ज्यादा समय तक बनी रहे, तो यह रुमेटाइड आर्थराइटिस या एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस का गंभीर संकेत हो सकता है।

विटामिन की कमी और गलत पोस्चर: शरीर में विटामिन D3 और कैल्शियम की भारी कमी होने या रात में गलत पोजीशन में सोने से भी मांसपेशियां और जोड़ सख्त हो जाते हैं।

राहत के लिए एक्सपर्ट्स की सलाह
अगर यह समस्या लगातार बनी हुई है, तो तुरंत आर्थोपेडिक एक्सपर्ट या रूमेटोलॉजिस्ट से संपर्क कर एक्स-रे और ब्लड टेस्ट (जैसे RA Factor, CRP) कराने चाहिए। तत्काल राहत के लिए सुबह उठते ही जोड़ों की हल्की गर्म सिकाई करें और बिस्तर पर ही हल्के स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करें। इसके अलावा, अपनी डाइट में हल्दी, अदरक और ओमेगा-3 फैटी एसिड जैसी एंटी-इन्फ्लेमेटरी चीजों को शामिल करना फायदेमंद होता है।

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