महाराष्ट्र की राजनीति में फिर बड़ा भूचाल, उद्धव ठाकरे की बैठक से 6 सांसद गायब, शिंदे गुट में जाने की तैयारी

मुंबई।

महाराष्ट्र के सियासी गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर आ रही है। राज्य में साल 2022 में हुई शिवसेना की ऐतिहासिक टूट की कहानी एक बार फिर दोहराती हुई दिख रही है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना (यूबीटी) गुट को दिल्ली में एक बहुत बड़ा झटका लगा है। पार्टी में बगावत को रोकने के लिए आज दिल्ली में बुलाई गई आपातकालीन बैठक पूरी तरह बेअसर साबित हुई। पार्टी द्वारा सख्त निर्देश यानी थ्री-लाइन व्हिप जारी होने के बावजूद नौ में से छह लोकसभा सांसद इस बैठक से गायब रहे, जिससे पार्टी के भीतर बड़ी फूट की पुष्टि हो गई है।

व्हिप के बावजूद बैठक में पहुंचे सिर्फ तीन सांसद

पार्टी के भीतर विद्रोह को दबाने के लिए उद्धव ठाकरे के आदेश पर दिल्ली के पुराने संसद भवन में सुबह 11 बजे यह जरूरी बैठक बुलाई गई थी। सांसदों की हाजिरी दर्ज करने के लिए बकायदा एक अलग रजिस्टर तैयार किया गया था। लेकिन तय समय पर संजय राउत के साथ केवल तीन सांसद ही वहां पहुंच सके, जिसके चलते बैठक को टालना पड़ा। बैठक में शामिल होने वाले वफादार सांसदों में अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और अरविंद सावंत के नाम शामिल हैं। बाकी छह सांसदों की गैरहाजिरी ने पार्टी के संसदीय दल में दरार को सबके सामने ला दिया है।

संजय राउत का गंभीर आरोप, सांसदों को खरीदने की कोशिश

बैठक के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने सत्ता पक्ष पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के सांसदों को पाला बदलने के लिए 15-15 करोड़ रुपये का ऑफर दिया जा रहा है। राउत ने भावुक होते हुए कहा कि अगर इसी तरह क्षेत्रीय पार्टियों को तोड़ा जाता रहा, तो देश में चुनाव लड़ने का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सांसदों के पार्टी छोड़ने के बारे में अभी उनके पास कोई आधिकारिक जानकारी नहीं आई है। आपको बता दें कि पार्टी ने पहले ही चेतावनी दी थी कि बैठक में न आने वाले सांसदों को अयोग्य घोषित करने यानी उनकी सदस्यता रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी।

लोकसभा अध्यक्ष को सौंपा पत्र, शिंदे गुट में विलय की तैयारी

पार्टी सूत्रों से मिली पक्की जानकारी के अनुसार, बैठक से नदारद रहने वाले बागी सांसद नागेश आष्टिकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजेनिंबालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे इस समय देश की राजधानी दिल्ली में ही डेरा डाले हुए हैं। इन सभी छह सांसदों ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली असली शिवसेना में शामिल होने का पूरा मन बना लिया है। सूत्रों का कहना है कि इन बागी सांसदों ने शिंदे गुट में अपने समूह के विलय की मांग करने वाले एक पत्र पर हस्ताक्षर करके लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंप दिया है, जिसके दस्तखत की जांच की जा रही है। कानून के मुताबिक अयोग्यता से बचने के लिए दो-तिहाई यानी कम से कम छह सांसदों का एक साथ जाना जरूरी है, जो कि इस मामले में पूरा होता दिख रहा है।

Related News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *