भानुप्रतापपुर । “अरे साहब, जरा देखिए तो सही! आपकी आंखों के सामने आखिर क्या हो रहा है?” कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम कच्चे में स्थित आरी डोंगरी लौह अयस्क खदान में इन दिनों कुछ ऐसे ही आक्रोशित सवाल गूंज रहे हैं। खदान का संचालन कर रही कंपनी गोदावरी इस्पात पर खनन, परिवहन और पर्यावरणीय नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं।

हाल ही में माइंस परिसर में डस्ट धंसने की एक बड़ी घटना सामने आई थी। सूत्रों के अनुसार, इस धंसे हुए डस्ट और खदान के वेस्ट मटेरियल को वैध दस्तावेजी प्रक्रिया और ट्रांजिट पास (परिवहन अनुमति) के बिना ही रात-दिन माइंस परिसर से बाहर निकाला जा रहा है। इस सामग्री को बिना किसी रॉयल्टी भुगतान के आसपास के क्षेत्रों और निकटवर्ती गांवों में अवैध रूप से डंप किया जा रहा है, जिससे सरकार को प्रतिदिन करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लग रहा है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और खनिज विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और दोषियों के खिलाफ क्या कदम उठाते हैं।

जल, जंगल, जमीन और जनस्वास्थ्य पर मंडराया बड़ा खतराविशेषज्ञों और ग्रामीणों का कहना है कि खनन क्षेत्र से निकलने वाले इस बारीक डस्ट मटेरियल को बिना किसी सुरक्षा उपाय के खुले में फेंका जा रहा है। तेज हवा चलने पर यह जहरीली धूल उड़कर आसपास के रिहायशी इलाकों और उपजाऊ कृषि भूमि पर जमा हो रही है। इससे न केवल वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा है, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों में सांस और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। इसके अलावा, बारिश के दिनों में यह वेस्ट मटेरियल बहकर स्थानीय जल स्रोतों को भी प्रदूषित कर सकता है।अवैध जंगल कटाई और निर्माण के भी आरोपशिकायतकर्ताओं का दावा है कि गोदावरी इस्पात द्वारा केवल डस्ट का ही अवैध परिवहन नहीं किया जा रहा, बल्कि खदान क्षेत्र के आसपास बिना किसी वैधानिक अनुमति के अवैध रूप से पेड़ों की कटाई और अवैध निर्माण कार्य भी धड़ल्ले से जारी हैं।प्रशासनिक मौन पर उठे सवाल, शिवसेना ने की कार्रवाई की मांगइतनी बड़ी अनियमितताओं के बाद भी संबंधित खनिज, राजस्व और वन विभाग की रहस्यमयी चुप्पी पर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर किसकी शह पर कंपनी को इतनी खुली छूट मिली हुई है? इस गंभीर मामले को लेकर शिवसेना नेता चंद्रमौली मिश्र ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने कलेक्टर कांकेर और मुख्य वन संरक्षक वन वृत्त, कांकेर को लिखित शिकायत सौंपकर गोदावरी इस्पात के इन अवैध कार्यों पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और क्षेत्र को नुकसान पहुंचाने वाली इस मनमानी पर जल्द उचित दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।फ़ोटो ।