अगर आप रोजाना वही दाल और सूखी सब्जियां खाकर ऊब चुके हैं और रसोई में कुछ नया ट्राई करना चाहते हैं, तो यह खबर आपके काम की है। आपने आज तक पंजाबी पकोड़ा कढ़ी या हरियाणवी कढ़ी तो कई बार खाई होगी, लेकिन आज हम आपको कढ़ी का एक बेहद लाजवाब और सात्विक वर्जन बताने जा रहे हैं। इसका नाम है राजस्थानी चना कढ़ी। बिना प्याज और लहसुन के बनने वाली यह पारंपरिक डिश अपने गाढ़े स्वाद, देसी तड़के और चटपटे फ्लेवर के लिए जानी जाती है, जो खाने का जायका दोगुना कर देती है।
दही, बेसन और काले चने का बेहतरीन स्वाद
दही, बेसन और उबले हुए काले चने के मेल से तैयार होने वाली यह कढ़ी स्वाद में जितनी बेमिसाल है, सेहत के लिए भी उतनी ही अच्छी है। सरसों के तेल में मेथी दाना, हींग और कड़ी पत्ते का देसी तड़का इसके स्वाद को कई गुना बढ़ा देता है। इसे बनाने में ज्यादा समय भी नहीं लगता। आप इसे दोपहर या रात के खाने में गरमा-गरम चावल, सादी रोटी या पराठे के साथ परोस सकते हैं।
इस पारंपरिक रेसिपी को बनाने के लिए जरूरी सामान
इसे बनाने के लिए आपको चाहिए 200 ग्राम उबले हुए काले चने, 200 ग्राम ताजा दही, 50 ग्राम बेसन, 2 चम्मच सरसों का तेल, आधा चम्मच सरसों के दाने, 2 साबुत लाल मिर्च, कड़ी पत्ता, 1 चम्मच मेथी दाना, एक चौथाई चम्मच हींग, आधा चम्मच हल्दी, 1 बड़ा चम्मच कश्मीरी लाल मिर्च, 1 चम्मच धनिया पाउडर, नमक स्वादानुसार, आधा चम्मच गरम मसाला, कसूरी मेथी और बारीक कटा हरा धनिया।
रसोई में ऐसे तैयार करें अपनी स्वादिष्ट कढ़ी
सबसे पहले एक कड़ाही में सरसों का तेल गर्म करें। तेल गर्म होने पर उसमें सरसों के दाने, साबुत लाल मिर्च, कड़ी पत्ता, मेथी दाना और हींग का तड़का लगाएं। अब इसमें उबले हुए चने डालकर 2-3 मिनट तक भून लें। इसके बाद एक बड़े बर्तन में दही, बेसन, हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर और करीब सवा लीटर पानी डालकर अच्छी तरह फेंट लें ताकि कोई गांठ न रहे।
अब इस घोल को कड़ाही में डालें और उबाल आने तक लगातार चलाते रहें, ताकि दही फटे नहीं। उबाल आने के बाद नमक और गरम मसाला मिलाएं और ढक्कन लगाकर 15 मिनट तक धीमी आंच पर पकने दें। आखिर में कसूरी मेथी और हरा धनिया डालकर मिलाएं। आपकी गरमा-गरम सात्विक राजस्थानी चना कढ़ी तैयार है।