फिंगर प्रिंट किट से लैस होंगे छत्तीसगढ़ के थाने, 500 पुलिसकर्मियों को मिली स्पेशल ट्रेनिंग

मिनी फिंगर प्रिंट डेवलपिंग किट पर राज्यस्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला संपन्न, 500 पुलिस कर्मियों को दिया गया प्रशिक्षण, सभी थानों को वितरित की गई आधुनिक फिंगर प्रिंट किट

रमेश गुप्ता रायपुर, । अपराध अनुसंधान को और अधिक वैज्ञानिक एवं प्रभावी बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर अटल नगर में गुरुवार को मिनी फिंगर प्रिंट डेवलपिंग किट के उपयोग संबंधी राज्यस्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम के निर्देशन में आयोजित की गई, जिसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए पुलिस कर्मियों ने भाग लिया।


कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सीआईडी के पुलिस महानिरीक्षक डॉ. ध्रुव गुप्ता ने कहा कि घटनास्थल से प्राप्त फिंगर प्रिंट और चांस प्रिंट अपराधियों की पहचान स्थापित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आधुनिक फिंगर प्रिंट किट के उपयोग से घटनास्थल पर सूक्ष्म साक्ष्यों का बेहतर ढंग से संकलन किया जा सकेगा, जिससे अज्ञात आरोपियों तक पहुंचने में पुलिस को बड़ी सहायता मिलेगी।
उन्होंने बताया कि राज्य में अपराध अनुसंधान की गुणवत्ता बढ़ाने तथा चांस प्रिंट की संख्या में वृद्धि के उद्देश्य से विभाग द्वारा मिनी फिंगर प्रिंट डेवलपिंग किट की खरीदी की गई है। यह किट घटनास्थल पर मौजूद अदृश्य फिंगर प्रिंट को विकसित करने और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने में उपयोगी सिद्ध होगी।


प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों द्वारा पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन और वीडियो के माध्यम से किट के उपयोग, तकनीकी विशेषताओं तथा फिंगर प्रिंट संकलन की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यशाला में प्रदेश के सभी जिलों से आए प्रधान आरक्षक एवं आरक्षक स्तर के लगभग 500 पुलिस कर्मियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।
विशेषज्ञ प्रशिक्षकों के रूप में फिंगर प्रिंट ब्यूरो के संचालक (उप पुलिस अधीक्षक) अजय कुमार साहू, उप पुलिस अधीक्षक विद्या जोहर, निरीक्षक कमलेश्वर सिंह, धर्मेंद्र कुमार भारती एवं अंजली मिंज ने प्रशिक्षण प्रदान किया।
कार्यशाला के दौरान राज्य के सभी थानों के लिए फिंगर प्रिंट किट का वितरण भी किया गया, जिससे भविष्य में अपराध अनुसंधान और साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सकेगा। पुलिस अधिकारियों ने इसे वैज्ञानिक जांच प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।

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