​भानुप्रतापपुर वन मंडल में वित्तीय नियमों की धज्जियां

मार्च का कैश बुक दो महीने बाद भी खाली, कैम्पा और विभागीय मद के करोड़ों के खर्च पर संदेह

​भानुप्रतापपुर। पूर्व वन मंडल कार्यालय भानुप्रतापपुर में वित्तीय पारदर्शिता और शासकीय नियमों को ताक पर रखने का एक बड़ा मामला सामने आया है। सूचना के अधिकार के तहत जानकारी लेने पहुंचे एक कार्यकर्ता के निरीक्षण के दौरान यह खुलासा हुआ कि वन मंडल द्वारा मार्च 2026 का कैश बुक अभी तक भरा ही नहीं गया है। मार्च का महीना बीते दो महीने से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन रिकॉर्ड का संधारण न होना विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर वित्तीय अनियमितता का संदेह पैदा कर रहा है।

सूचना के अधिकार कार्यकर्ता द्वारा भानुप्रतापपुर वन मंडल से विभागीय मद और कैम्पा मद के अंतर्गत अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 तक की कैश बुक की अभिप्रमाणित छायाप्रति मांगी गई थी। नियमों के तहत कैश बुक का अवलोकन करने के लिए जब कार्यकर्ता 1 जून 2026 को कार्यालय पहुंचे, तब इस बड़ी लापरवाही का पर्दाफाश हुआ। करोड़ों रुपये के विभागीय और कैम्पा मद की राशि खर्च हुए महीनों बीत गए, लेकिन उसका आधिकारिक रिकॉर्ड मेंटेन नहीं किया गया है।

​इन शासकीय नियमों का हुआ है सरेआम उल्लंघन

​कैश बुक का समय पर न भरा जाना केवल एक लिपिकीय चूक नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर छत्तीसगढ़ शासन के वित्तीय नियमों का उल्लंघन है। शासकीय नियमों के अनुसार, हर सरकारी विभाग में प्रतिदिन या अधिकतम साप्ताहिक स्तर पर वित्तीय लेन-देन का मिलान कर कैश बुक को अद्यतन करना अनिवार्य है। महीना खत्म होने के बाद अगले महीने के शुरुआती सप्ताह में पिछले महीने की क्लोजिंग रिपोर्ट लॉक हो जानी चाहिए। कैम्पा फंड की निगरानी सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस और राष्ट्रीय स्तर पर होती है। इसके तहत खर्च की गई राशि का रियल-टाइम या मासिक ऑडिट ट्रैकिंग अनिवार्य है। दो महीने तक रिकॉर्ड न लिखना वित्तीय हेराफेरी की आशंका को जन्म देता है।

​RTI अधिनियम 2005 की अवहेलना: धारा 4(1)(a) के तहत हर सरकारी कार्यालय को अपने रिकॉर्ड को व्यवस्थित और अपडेट रखना अनिवार्य है ताकि पारदर्शिता बनी रहे। रिकॉर्ड का अपूर्ण होना आरटीआई के मूल उद्देश्य को आघात पहुँचाता है।

​कार्यालयीन रिकॉर्ड में दर्ज कराई गई आपत्ति

​इस गंभीर वित्तीय चूक और अपूर्णता को आधिकारिक तौर पर कार्यालयीन रिकॉर्ड में दर्ज करा दिया गया है। जब वित्तीय वर्ष 2025-26 समाप्त हुए दो महीने बीत चुके हैं, तो भानुप्रतापपुर पूर्व वन मंडल का मार्च 2026 का लेखा-जोखा अब तक क्यों छिपाया जा रहा है? क्या इस देरी के पीछे खर्चों में की गई किसी बड़ी गड़बड़ी को दबाने का प्रयास किया जा रहा है? ​इस मामले में उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों के खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की जा रही है।

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