Surajpur News: सूरजपुर में CSR फंड का बड़ा खेल; खोखापारा तालाब के लिए आए 19.61 लाख रुपए डकार गए अफसर और नेता, धरातल पर काम शून्य

फिरोज अंसारी, सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से भ्रष्टाचार की एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। भैयाथान जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत चुनगड़ी में विकास और पर्यावरण संरक्षण के दावों की सरेआम धज्जियां उड़ा दी गई हैं। एसईसीएल (SECL Bhatgaon) के सीएसआर मद से स्वीकृत लाखों रुपए का विभागीय अधिकारियों, सरपंच और सचिव ने मिलकर ऐसा बंदरबांट किया कि सालभर बाद भी धरातल पर काम पूरी तरह से ठप पड़ा है।

कलेक्टर ने दिए थे 19.61 लाख, पहली किस्त के 7.84 लाख का अता-पता नहीं


मिली जानकारी के मुताबिक, जिला प्रशासन ने ग्रामीणों की सुविधा और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया था। कार्यालय कलेक्टर सूरजपुर (Collector Office Surajpur) द्वारा भटगांव क्षेत्र के सीएसआर फंड (CSR Fund) से चुनगड़ी के खोखापारा तालाब (Khokhapara Talab Chungadi) के कायाकल्प के लिए 19 लाख 61 हजार रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई थी।

नियम के मुताबिक, काम शुरू करने के लिए 40 फीसदी अग्रिम राशि यानी 7 लाख 84 हजार रुपए की पहली किस्त भी जारी कर दी गई। लेकिन एक पूरा साल बीत जाने के बाद भी आज तक मौके पर निर्माण कार्य की एक ईंट भी नहीं रखी जा सकी है।

कागजों में शानदार था मास्टर प्लान, धरातल पर सिर्फ धोखा

योजना के अनुसार, खोखापारा तालाब को गांव के एक खूबसूरत और उपयोगी सार्वजनिक स्थल के रूप में चमकाया जाना था। इसके लिए बकायदा एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई थी, जिसके तहत ये काम होने थे। तालाब के जलस्तर को बढ़ाने और पानी साफ रखने के लिए तकनीकी काम। तालाब के चारों तरफ पक्की सीढ़ियां, सुंदर घाट, सुव्यवस्थित पाथ-वे (पिचिंग) और ग्रामीणों के बैठने की व्यवस्था। मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए तालाब के किनारों पर मजबूत साइड वॉल का निर्माण।

लेकिन हकीकत यह है कि आज तालाब अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। सबसे बड़ा सवाल तो यह उठ रहा है कि जहां तालाब का निर्माण होना है, वहां पुलिया बनाकर जल संग्रह कैसे किया जाएगा?

3 महीने की डेडलाइन पार, पारदर्शिता बोर्ड भी गायब

भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कलेक्टर ने आदेश में बेहद सख्त शर्तें रखी थीं, जिन्हें अफसरों ने पूरी तरह ठेंगे पर रख दिया। वित्तीय किस्त जारी होने के मात्र 3 महीने के भीतर पूरा काम खत्म करना था, लेकिन सालभर बाद भी शुरुआत नहीं हुई। अगली किस्तें चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) के उपयोगिता प्रमाण पत्र के बाद ही जारी होनी थीं। ऐसे में बिना काम के पैसे का आहरण कैसे हो गया, यह जांच का विषय है। जनता की जानकारी के लिए कार्यस्थल पर लागत और समय-सीमा का बड़ा बोर्ड लगाना अनिवार्य था, जो मौके से गायब है।

जांच के बाद होगी कार्रवाई: जनपद सीईओ

सीएसआर सामाजिक सरोकार के इस पैसे को ग्रामीण विकास और पर्यावरण सुधार में लगना था, लेकिन आपसी साठगांठ ने पूरे प्रोजेक्ट को ही निगल लिया। इस पूरे मामले पर जब भैयाथान जनपद पंचायत के सीईओ (CEO Janpad Panchayat) विनोद गुप्ता से बात की गई, तो उन्होंने कहा, “काम चालू है। अगर काम समय सीमा पर पूरा नहीं हुआ है, तो मामले की पूरी जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। अब देखना यह होगा कि इस खुली लापरवाही पर जिला प्रशासन क्या एक्शन लेता है और क्या चुनगड़ी ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों पर कानूनी गाज गिरती है या नहीं।

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