राजपाट — प्रफुल्ल पारे
छत्तीसगढ़ की राजनीति में कांग्रेस और भाजपा में सब कुछ बहुत अच्छा नहीं चल रहा है। इन दोनों ही पार्टियों के दिग्गज नेता जहां अपनी ही पार्टी का अनुशासन तोड़ रहे हैं, वहीं दूसरी पार्टी के नेताओं को भी लपेटे में ले रहे हैं। पहले बात कांग्रेस की कर लेते हैं, जहां प्रदेश अध्यक्ष के पद को लेकर जमकर रस्साकशी चल रही है। कांग्रेस नेता टीएस सिंहदेव ने जैसे ही प्रदेश अध्यक्ष का पद संभालने की इच्छा जाहिर की तो मौजूदा अध्यक्ष दीपक बैज ने उन्हें दिल्ली की राजनीति करने की नसीहत दे डाली। यह कोई पहली बार नहीं हो रहा जब टीएस बाबा को किनारे लगाने की कोशिश की गई हो। पहले भी, जब कांग्रेस राज्य में सत्ता में थी तब भी, दबे स्वर में टीएस बाबा पर भाजपा के साथ मिले होने का आरोप लगता था। प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष पद किसे मिले? किसे नहीं ये कांग्रेस का अंदरूनी मामला है, लेकिन राज्य के कांग्रेस नेता तो अब एक कदम आगे बढ़कर बयान देने लगे हैं। भाजपा के कद्दावर नेता और रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल को तो कांग्रेस के नेता भाजपा छोड़ने की सलाह दे रहे हैं। उन्हें लग रहा है कि बृजमोहन अग्रवाल की भाजपा में पूछपरख कम हो रही है। अब कांग्रेस नेताओं की ऐसी बयानबाजी से भाजपा नेता भला कैसे चुप रह सकते हैं। भाजपा के एक विधायक और पूर्व मंत्री जिन्हे पार्टी ने किनारे लगा दिया है। वे प्रदेश में भाजपा के अकेले ऐसे नेता हैं जिनके भाई के घर केंद्रीय जांच एजेंसियों ने पिछले दिनों छापा मारा था। अब वो भी पिक्चर में आ गए हैं। उन्होंने कांग्रेस नेता टीएस बाबा को कांग्रेस छोड़ने की सलाह दे डाली। उनका कहना है कि कांग्रेस, टीएस बाबा का निरंतर अपमान कर रही है, इसलिए बाबा को पार्टी छोड़ देना चाहिए। वैसे देखा जाए तो उनके वक्तव्य में एक आग्रह छिपा है कि टीएस बाबा भाजपा ज्वाइन कर लें। अब आप सोचिये कि जिनकी खुद अपनी पार्टी में नहीं चल रही है, वो दूसरी पार्टी ने नेता को मान, सम्मान, अपमान और स्वाभिमान का पाठ पढ़ा रहे हैं। उर्दू के किसी शायर ने इन जैसों के लिए ही लिखा है ” खुद मियां फजीहत दूसरों को नसीहत..”
दुल्हन के हक़ पर भी डाका
छत्तीसगढ़ के महिला एवं बाल विकास विभाग का हाल बेहाल है। आकंठ भ्र्ष्टाचार में डूबे इस विभाग के अधिकारी-कर्मचारी अब मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में दुल्हन को मिलने वाली सहायता राशि पर भी डाका डालने को आमादा हैं। प्रदेश में गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए सरकार ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना बनाई है। इसके तहत एक विवाह पर 50000 रुपये खर्च किये जाते हैं। पहले शादी का पूरा खर्च सरकार वहन करती थी और कन्या को गृहस्थी बसाने के लिए जरुरी सामान भी मुहैया कराती थी। जब इन सामग्रियों की खरीदी में भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने लगी तो सरकार ने तय किया कि दुल्हन को 35000 रुपये का चेक या बैंक में राशि ट्रांसफर की जाएगी। विवाह के आयोजन टेंट,भोजन और अन्य इंतजामों पर 15000 रुपए खर्च किये जायेंगे। सरकार ने यह सब भ्र्ष्टाचार रोकने के लिए किया लेकिन विभाग के उस्ताद भी कम नहीं हैं। उन्होंने भी इसकी काट निकाल ली। राज्य सरकार ने इस योजना के अंतर्गत इस वर्ष छह हजार से अधिक जोड़ों का विवाह संपन्न कराया जिसे गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज किया गया। अब इस योजना में भ्रष्टाचार की इन्तहा देखिये कि जिन कन्याओं के अकाउंट में 35000 रुपए जमा किये जाने हैं, उस दुल्हन के परिवार से पांच हजार रुपये पहले ही वसूल लिए जाते हैं। जिसने यह कमीशन दे दिया उसके अकाउंट में राशि जमा हो जाती है, जिसने नहीं दिया वह विभाग के चक्कर लगाता रहता है। कमीशन का खेल केवल यहीं नहीं रुकता। विवाह के आयोजन में खर्च होने वाले शेष 15000 रुपए में भी पांच हजार कमीशनखोरी में चला जाता है। अब इसके आगे की कहानी तो और भी भयावह है। होता ये है कि अनेक विवाह समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय खुद शामिल होते हैं और 35000 रुपये का चेक अपने हाथ से कन्याओं को वितरित करते हैं। बताते हैं कि विभाग का निचला अमला इन लाभार्थियों के घर-घर जाकर कमीशन की मांग करता है। इस कमीशनखोरी से दुखी परिवारों ने रायपुर जिले एक युवा भाजपा विधायक से शिकायत भी की है। अब आप ही अंदाज लगाइये कि प्रदेश में हर साल हजारों कन्याओं का विवाह होता है तो कमीशन का खेल कितना तगड़ा होगा।

चूजा है नया विधायक इनके लिए
कहते हैं कि अनुभव किसी भी आदमी को बड़ा बनाता है बड़बोला नहीं, लेकिन देश और राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में बड़प्पन गौण होता जा रहा है और बड़बोलापन हावी। अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अमरजीत भगत को ही लीजिये, उन्होंने सीतापुर विधानसभा से लगातार चुनाव जीता और भूपेश बघेल की सरकार में प्रभावशाली मंत्री भी रहे, लेकिन एक ही चुनावी पराजय ने इस वरिष्ठ नेता की भाषा को गरिष्ठ बना दिया। मामला ये है कि पूर्व मंत्री जी को चुनाव में पराजित करने वाले भाजपा के पूर्व सैनिक विधायक रामकुमार टोप्पो का अपने क्षेत्र के नायब तहसीलदार के साथ किसी महिला के विभागीय प्रकरण को लेकर विवाद हो गया और विवाद इतना बढ़ा कि महिला ने नायब तहसीलदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी। इस महिला के पक्ष में आये भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो के खिलाफ नायब तहसीलदार ने भी एफआईआर लिखवा दी, जिसमें उन्होंने विधायक और उनके साथियों पर मारपीट और गाली गलौज करने का आरोप लगाया। चूँकि मामला सीतापुर का है तो टोप्पो से चुनाव हार चुके अमरजीत भगत भला कैसे चुप रहते। उन्होंने भी इस फड्डे में टांग अड़ा दी और कह दिया कि ये विधायक नया नया है… चूजा है… अभी दाना चुगना सीख रहा है। पूर्व मंत्री जी यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों में से कोई भी हमसे मिलेगा और हमारे हिसाब से चलेगा तो विधायक जी को हम सबक सिखा देंगे। बिलकुल सिखा देंगे पूर्व मंत्री जी का अनुभव तो भरा पूरा मुर्गा है जो दाना चुगना भी इस चूजे से ज्यादा अच्छा जानता है। दिलचस्प बात ये कि पूर्व मंत्री जी के इतना कहने के बाद भी दोनों पक्षों में से किसी ने भी उनसे संपर्क नहीं किया। या समझ लीजिये कि दाना चुगने में अनुभवी मुर्गे के आगे दाना नहीं डाला। अगर विधायक जी चूजा हैं तो उन्हें पकड़ना कठिन नहीं है लेकिन मुर्गे को पकड़ना बहुत कठिन काम है कभी कोशिश करके देखिये।

असली नकली हिन्दू की राजनीति
राजनीति में धर्म या धर्म की राजनीति इस विषय पर देश में खूब बहस होती है। इससे छत्तीसगढ़ भी अछूता नहीं है, कुछ समय पहले बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेन्द्र शास्त्री के प्रदेश में आगमन पर और उनकी कथा को लेकर राज्य की कांग्रेस ने जमकर बवाल काटा था। कांग्रेस ने इस बात पर नाराजगी जताई कि एक कथावाचक अपनी कथा के दौरान समाज में अन्धविश्वास को बढ़ावा देते हैं। उन्हें किस हैसियत से शासकीय विमान उपलब्ध कराया गया। यह मामला अभी शांत ही हुआ था कि विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य को लेकर एक बयान दे दिया कि वे रामभद्राचार्य को जगद्गुरु तो क्या गांव का गुरु भी नहीं मानते। उनके लिए रामभद्राचार्य केवल भाजपा के प्रचारक हैं। साथ ही महंत ने यह भी कहा कि धार्मिक कथा करने वाले कथावाचक भी फर्जी होते हैं, इसलिए पार्टी के लोगों को उनसे दूरी बनाकर रखना चाहिए। इस बयान के जवाब में खुद रामभद्राचार्य ने महंत को बताया कि वे जगद्गुरु कैसे बने हैं और महंत जी चाहें तो उनकी परीक्षा भी ले सकते हैं। हालांकि जगद्गुरु रामभद्राचार्य भी अपने बयानों के चलते खूब विवादों में रहते हैं, लेकिन इसकी परवाह किये बिना, इस मामले में भाजपा आक्रामक हो गई है और हो भी क्यों ना। कांग्रेस नेता चरणदास महंत ने इस बयान के जरिये भाजपा को उसका पसंदीदा मुद्दा थाली में परोस कर जो दे दिया है। भाजपा को भी अवसर मिल गया है कांग्रेस को हिन्दू विरोधी पार्टी साबित करने का। ऐसा माना जा रहा है कि महंत जी का यह बयान उनके लिए फाँस बन सकता है, इसलिए अब महंत जी के समर्थक अपने नेता को सच्चा हिन्दू बताने में लग गए हैं। सोशल मीडिया पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का सम्मान करते महंत जी के वीडियो पोस्ट किये जा रहे हैं। यह बताने की कोशिश की जा रही है कि हमारे नेता असली हिन्दू हैं। बहरहाल, जब राजनीति धर्म को असली और नकली बताने लगे तो नुकसान राजनीति का नहीं, बल्कि धर्म का ही होता है।
