कोयलीबेड़ा में फूटा जनाक्रोश, 18 पंचायतों के 68 गांवों ने ठोका तालाबंदी का बिगुल
सरकारी दफ्तरों में ताला, सड़क पर उतरे हजारों ग्रामीण; सांसद-विधायक पर वादाखिलाफी के आरोप
कांकेर। कभी नक्सल आतंक की वजह से सुर्खियों में रहने वाला कांकेर जिले का कोयलीबेड़ा क्षेत्र अब विकास की बदहाली को लेकर उबल पड़ा है। नक्सलवाद खत्म होने के सरकारी दावों के बीच क्षेत्र की 18 पंचायतों के 68 गांवों के ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। गुस्साए ग्रामीण पिछले दो दिनों से चक्काजाम कर सड़क पर डटे हुए हैं, वहीं कई सरकारी दफ्तरों में ताला जड़कर शासन-प्रशासन के खिलाफ खुला विद्रोह छेड़ दिया है।
ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब तक उनकी सात सूत्रीय मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होगी, तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा और सरकारी दफ्तरों का ताला भी नहीं खुलेगा।
“विकास” के दावों की खुली पोल
कोयलीबेड़ा वही इलाका है, जहां कभी नक्सलवाद के कारण विकास की किरण तक नहीं पहुंच पाई थी। अब जब सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने और माओवाद कमजोर पड़ने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, तब सवाल उठ रहा है कि आखिर क्षेत्र आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और बैंक जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए क्यों तरस रहा है?
ग्रामीणों का आरोप है कि सांसद भोजराज नाग और विधायक विक्रम उसेंडी को कई बार आवेदन और ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता के कारण पूरा क्षेत्र आज भी बदहाल स्थिति में जीने को मजबूर है।
फरवरी में मिला था भरोसा, अब टूटा सब्र
ग्रामीणों ने बताया कि 2 फरवरी 2026 को भी कोयलीबेड़ा ब्लॉक में बड़ा जनआंदोलन हुआ था। उस दौरान प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने सात सूत्रीय मांगों के निराकरण का भरोसा दिया था। लेकिन चार महीने बीतने के बाद भी हालात जस के तस बने रहे।
आश्वासन की राजनीति से नाराज ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई छेड़ दी है। आंदोलनकारी साफ कह रहे हैं कि इस बार केवल कागजी भरोसे से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीन पर विकास चाहिए।
इन मांगों को लेकर भड़का आक्रोश
धरनारत ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय को कोयलीबेड़ा में स्थापित करना शामिल है। ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय को ब्लॉक मुख्यालय के नाम पर पखांजूर भेजा जा रहा है, जिससे क्षेत्र के विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित होगा।
इसके अलावा जिला सहकारी बैंक की शाखा खोलने, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल व्यवस्था सुधारने, खाद-बीज संकट खत्म करने, जर्जर स्कूल भवनों और आश्रमों की मरम्मत कराने तथा कोयलीबेड़ा में कॉलेज खोलने की मांग जोर-शोर से उठाई जा रही है।
ग्रामीणों ने डीएमएफ और सीएसआर मद की राशि को क्षेत्र के विकास में खर्च करने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि खनिज और संसाधनों से मिलने वाली राशि का लाभ स्थानीय लोगों तक नहीं पहुंच रहा।
“अब और नहीं सहेंगे उपेक्षा”
आंदोलन में शामिल ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों तक नक्सलवाद की मार झेलने के बाद अब वे विकास के नाम पर उपेक्षा बर्दाश्त नहीं करेंगे। लोगों का कहना है कि यदि सरकार और जनप्रतिनिधि अब भी नहीं चेते, तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।
कोयलीबेड़ा की सड़कों पर उमड़ा यह जनसैलाब अब केवल मांगों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि उस आक्रोश की तस्वीर बन चुका है, जो वर्षों की अनदेखी और अधूरे वादों से पैदा हुआ है।