शत्रु कीट की रफ्तार पर ब्रेक

कीटनाशक विक्रेता संस्थानों की सतर्क खरीदी

राजकुमार मल

भाटापारा- पनपते हैं 21 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान में लेकिन आहार लेने और अंडे देने की क्षमता भी बेहद धीमी हो चली है क्योंकि तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा पहुंचा है।

आगत खरीफ फसलों में इस बार कीट प्रकोप काफी हद तक कम या नियंत्रित रह सकता है क्योंकि कीटों के पनपने के लायक तापमान नहीं है।अपवादस्वरूप रस चूसक कीट जरुर बढ़ सकते हैं लेकिन क्षति पहुंचाने लायक स्थिति में नहीं होंगे। आशंका खरपतवार को लेकर जरुर बन रही है,जिस पर किसानों को ख़ासा ध्यान देना होगा।


सक्रियता नहीं

अधिकांश कीट 21 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान में पनपते हैं। सक्रियता में कमी 40 डिग्री सेल्सियस जैसे तापमान में आने लगती है। फिलहाल जैसा तापमान बना हुआ है, उसके बाद आहार लेने तथा प्रजनन क्षमता में कमजोरी देखी जा रही है। किसान इस अवसर का लाभ उठाकर खेत की गहरी जुताई करके तेज धूप में छोड़ देते हैं, तो हानिकारक कीटों के अंडे और लार्वा तथा प्यूपा आसानी से समाप्त हो सकते हैं।


बढ़ सकते हैं यह कीट

गर्म और शुष्क मौसम में ही पनपते हैं रस चूसक कीट। इनमें सफेद मक्खियां, थ्रिप्स और माइट्स का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है। तापमान जिस स्तर पर पहुंचा हुआ है, उसे देखते हुए आशंका है कि फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचाने वाले यह कीट अपनी सक्रियता बढ़ा सकते हैं। लिहाजा किसानों को न केवल सतर्कता बढ़ानी होगी बल्कि प्रबंधन भी चुस्त रखना होगा।


मौका खरपतवार का

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी बारिश के पूर्वानुमानों तथा वर्तमान तापमान की स्थितियों को देखते हुए इस बार खरपतवार की शिकायतों में इजाफा की आशंका बन रही है क्योंकि कमजोर बारिश की स्थितियों में ही खरपतवार का अंकुरण न केवल जोरदार होता है बल्कि बढ़वार भी तेज गति से होती है। लिहाजा यह स्थितियां बनीं तो नुकसान का दायरा बढ़ने की आशंका है।

गर्मी ने रोकी कीटों की रफ्तार

वर्तमान में 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान के कारण अधिकांश हानिकारक कीटों की सक्रियता, भोजन ग्रहण करने और प्रजनन क्षमता में कमी देखी जा रही है, जिससे आगामी खरीफ फसलों में कीट प्रकोप अपेक्षाकृत नियंत्रित रह सकता है। हालांकि गर्म एवं शुष्क परिस्थितियों में रस चूसक कीट जैसे सफेद मक्खी, थ्रिप्स और माइट्स की सक्रियता बढ़ने की आशंका बनी हुई है। किसानों को इस समय गहरी जुताई, खेत स्वच्छता तथा प्रारंभिक खरपतवार प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि कमजोर मानसून अथवा अनियमित वर्षा की स्थिति में खरपतवार तेजी से बढ़ सकते हैं।

डॉ. अर्चना केरकेट्टा, एसोसिएट प्रोफेसर (कीटविज्ञान), बीटीसी कॉलेज ऑफ़ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर

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