चिरायु योजना और स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता से संवर रहा बस्तर का भविष्य: ग्राम खैरवाही के पीयूष को मिला नया जीवन

चारामा । मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान और ‘चिरायु योजना’ के साझा प्रयासों ने आज बस्तर संभाग के दूरस्थ अंचलों में स्वास्थ्य सेवा की नई इबारत लिख दी है। “स्वस्थ होता बस्तर” के संकल्प को चरितार्थ करते हुए स्वास्थ्य विभाग के जांबाज कर्मचारियों और चिरायु टीम (A+B) ने ब्लॉक चारामा के आंगनवाड़ी केंद्रों में सघन स्वास्थ्य परीक्षण अभियान चलाकर कई मासूमों के जीवन में मुस्कान लौटाई है।
​स्वास्थ्य विभाग के ‘मैदानी योद्धाओं’ की मेहनत लाई रंग
​स्वास्थ्य विभाग के मैदानी कर्मचारियों और चिरायु दल के सदस्यों ने चारामा ब्लॉक के दुर्गम क्षेत्रों में पहुंचकर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। इस दौरान टीम ने केवल औपचारिकता पूरी नहीं की, बल्कि सूक्ष्म जांच के जरिए गंभीर बीमारियों की पहचान की। जांच के दौरान कुल 14 गंभीर मामले सामने आए, जिनमें शामिल हैं:
​जन्मजात हृदय रोग: 02 बच्चे
​हर्निया: 04 बच्चे
​कटे-फटे होंठ: 01 बच्चा
​हाइड्रोनेफ्रोसिस: 01 बच्चा
​जन्मजात बधिरता: 01 बच्चा
​जननांगों में विकृति: 01 बच्चा
​साथ ही एनीमिया और कुपोषण के कई मामले भी चिन्हित किए गए।
​पीयूष के सफल ऑपरेशन ने दी परिवार को नई उम्मीद
​सफलता की इस कहानी का सबसे प्रेरक अध्याय ग्राम खैरवाही से सामने आया है। यहाँ के निवासी किशन पोया के पुत्र पीयूष पोया लंबे समय से हर्निया की बीमारी से ग्रसित थे। चिरायु दल की सक्रियता से आयुष्मान भारत योजना के तहत पीयूष का नि:शुल्क और सफल ऑपरेशन संपन्न हुआ। ऑपरेशन के बाद पीयूष अब पूरी तरह स्वस्थ है।
​कर्मचारियों के प्रति जताया आभार
​पीयूष के माता-पिता ने इस नई जिंदगी के लिए सरकार के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों और चिरायु दल (A+B) के प्रति विशेष कृतज्ञता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के समर्पण और सही समय पर दी गई सलाह के कारण ही उनके बच्चे का इलाज संभव हो पाया।
​”भारत सरकार और राज्य सरकार की ये योजनाएं गरीब बच्चों के लिए ‘जीवनदायिनी’ साबित हो रही हैं। चिरायु दल के सदस्यों और जिला अस्पताल कांकेर व उच्च संस्थान रायपुर के चिकित्सकों का सेवा भाव प्रशंसनीय है।”
​निष्कर्ष: जिला अस्पताल कांकेर और रायपुर के उच्च संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल और चिरायु टीम की जमीनी मेहनत ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो स्वास्थ्य सेवाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सकती हैं। इन कर्मचारियों का कार्य समाज के लिए एक प्रेरणा है।
रिपोर्ट अनूप वर्मा

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