छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में स्थित करकाभाट गांव प्राचीन सभ्यता के रहस्यों का केंद्र बना हुआ है। यहां के विशाल पत्थरों के बीच छिपी कहानी आज भी दुनिया को अपनी ओर खींच रही है। ऐतिहासिक धरोहरों के जानकारों के अनुसार, साल 1991 में भारतीय पुरातत्व अनुसंधान टीम के निरीक्षण के दौरान यहां करीब साढ़े तीन हजार साल पुराने महापाषाण युगीन कब्रों के प्रमाण मिले थे।
करकाभाट के आसपास के 7 से 8 गांवों के 10 किलोमीटर के दायरे में लगभग 5000 प्राचीन कब्रों के अवशेष पाए गए हैं। इसके साथ ही यहां प्राचीन शैलाश्रय भी मिले हैं, जो मानव सभ्यता की मौजूदगी की पुष्टि करते हैं। इन कब्रों की बनावट बेहद खास है, जिनमें से अधिकतर उत्तर से दक्षिण दिशा की ओर बनी हुई हैं। निरीक्षण के दौरान बड़ी कब्रों में सामूहिक शव और छोटी कब्रों में पति-पत्नी को एक साथ दफनाने के संकेत मिले हैं।
खुदाई के दौरान इन कब्रों से कई महत्वपूर्ण अवशेष भी प्राप्त हुए हैं। इनमें भाले के अग्रभाग, तीरों की नोक, पत्थर के औजार और तांबे के आभूषण शामिल हैं। ये चीजें प्रमाणित करती हैं कि उस दौर की आबादी तकनीक और युद्ध कला में काफी निपुण थी।
वर्तमान में इस स्थल की चर्चा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही है। हाल ही में दक्षिण कोरिया से आए विदेशी शोधकर्ताओं और पर्यटकों ने इस क्षेत्र का दौरा किया। वे यहां की ऐतिहासिक संरचनाओं को देखकर प्रभावित तो हुए, लेकिन धरोहर के संरक्षण के अभाव पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई। उनका मानना है कि यह स्थल अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहचान रखने की क्षमता रखता है।
पुरातत्व विभाग की अनदेखी के कारण आज इतिहास की यह अनमोल धरोहर खतरे में है। कई विशाल पत्थर गिर चुके हैं और स्थल की पहचान मिटती जा रही है। यदि प्रशासन और सरकार इस पर ध्यान दें, तो करकाभाट न केवल शोधार्थियों के लिए बल्कि दुनिया भर के पर्यटकों के लिए एक प्रमुख ऐतिहासिक स्थल बन सकता है।