0आज की जनधारा का अनुमान सच साबित हुआ
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0प्रकरण सुलझाने में जीपीएस व सीसीटीवी की अहम भूमिका 0
दिलीप गुप्ता
सरायपाली= चिवराकुटा गैस चोरी कांड में जप्त किये गए 6 गैस कैप्सूल से गैस की चोरी होने की सूचना पर सिंघोडा पुलिस पर उठ रही उँगलियों को महासमुंद पुलिस अधीक्षक के द्वारा की गई कार्यवाही के पश्चात वास्तविक स्थिति सामने आने के बाद सिंघोडा पुलिस की संलिप्तता पर उठ रहे सवालों पर विराम लग गया है । जांच के बाद अभनपुर स्थित ठाकुर पेट्रोकेमिकल प्राइवेट लिमिटेड प्लांट के मालिक , डायरेक्टर , मैनेजर व अन्य की प्रमाणित संलिप्तता सामने आने के बाद सभी आरोपियों के खिलाफ थाने में प्राथमिक रिपोर्ट दर्ज की गई व एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है शेष की तलाश की जा रही है ।

ज्ञातव्य हो कि पूर्व में ही आज की जनधारा ने इस प्रकरण में सिंघोड़ा पुलिस की संलिप्तता या भूमिका होने की संभावना से इनकार कर दिया था । जो जांच मे सही पाया गया ।
ज्ञातव्य हो कि विगत 23 दिसंबर 2025 को चिवराकुटा में इंडेन गैस एजेंसी के द्वारा वन विभाग से प्राप्त वनभूमि पर 6 गैस कैप्सूल से मशीनों के माध्यम से गैस रिफिलिंग कर गैस की चोरी की जा रही थी । सरायपाली एसडीएम अनुपमा आनंद रात्रि को सीमा पर धान तस्करी रोकने अपने स्टाफ के साथ गश्त पर निकली थी कि शंका के आधार पर उक्त वनभूमि में छापामार कार्यवाही करते हुवे 6 गैस कैप्सूल से मशीन के माध्यम से गैस चोरी करते पकड़ा गया था । एसडीएम द्वारा खाद्य अधिकारीयो के माध्यम से प्रकरण पंजीबद्ध किया गया । उक्त 6 कैप्सूल को सिंघोड़ा पुलिस को सुरक्षित रखने कहा गया । सिंघोड़ा पुलिस द्वारा थाना परिसर से लगे स्थान पर कैप्सूल व गैस की सुरक्षा को देखते हुवे उक्त वाहनों को सीसीटीवी कैमराे के नजर में रखा गया था साथ ही बाकायदा 2 गार्डों की ड्यूटी के साथ 24 घंटे निगरानी की जाती थी । लगभग 3 माह तक प्रतिदिन सिंघोड़ा पुलिस की निगरानी मे सुरक्षित रहने के बाद 1/4/26 को गैस को एक ज्वलनशील पदार्थ मानते हुवे व उसके और बेहतर सूरक्षा को ध्यान में रखते हुवे कलेक्टर महासमुंद के आदेश पर सिंघोड़ा पुलिस द्वारा खाद्य अधिकारीयो को सुपुर्दनामे में दिए जाने के आदेश के बाद खाद्य अधिकारीयो को सौंप दिया गया था।
उक्त गैस कैप्सूल को ठाकुर पेट्रोकेमिकल प्राइवेट लिमिटेड प्लांट में रखवाया गया । इस बीच कैप्सूल मालिकों द्वारा न्यायालयीन आदेश के तहत जब अभनपुर स्थित ठाकुर पेट्रोकेमिकल प्राइवेट लिमिटेड प्लांट में जब गैस कैप्सूल लेने गए तो वहां पता चला कि कैप्सूल वाहनों में गैस ही नहीं है । तब यह मामला सामने आया । इस बीच खाली गैस कैप्सूलो को लेकर सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों से सिंघोड़ा पुलिस को शंका के दायरे में रखते हुवे टिप्पणी की जा रही थी । अनेक लोगों द्वारा सत्यता के अभाव में पुलिस के कार्यशैलियों पर उँगली उठाई जा रही थी । जबकि सिंघोड़ा पुलिस का इस गैस चोरी या शार्टेज प्रकरण में कहीं कोई भूमिका व संलिप्तता थी ही नहीं । कलेक्टर के निर्देश पर खाद्य अधिकारीयों को सभी गैस कैप्सूलो को जिस स्थिति में 23/12/25 को पुलिस को प्राप्त हुआ था उसी स्थिति में सौंप दिया गया था ।
उक्त सभी गैस कैप्सूलो को अभनपुर के ठाकुर पेट्रोकेमिकल प्राइवेट लिमिटेड प्लांट में रखे जाने का आदेश व निर्देश संभवतः मिलने के बाद ही वहां रखा गया था । सुपुर्द नामे में लेते समय इन गैस कैप्सूलो का वजन नहीं कराया जाना ही एक भूल या चूक की वजह से इतनी बड़ी घटना घटित हो सकी। संभवतः इसी चूक व भूल का फायदा आरोपियों द्वारा मिलीभगत कर गैस की चोरी की गई व इल्जाम लगाया गया सिंघोड़ा पुलिस के ऊपर । गैस कैप्सूल मालिक द्वारा कलेक्टर को की गई शिकायत मे भी बिना एलपीजी गैस के थाना सिंघोड़ा द्वारा सुपुर्दनामा में दिए जाने की जानकारी दी गई थी । जिसके बाद से उक्त भ्रम व अफवाह फैलाया गया जिसकी वजह से सिंघोड़ा पुलिस संदेह के दायरे में आ गई थी ।
मामले की गंभीरता को देखते हुवे पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार द्वारा प्रत्येक दृष्टिकोण व एंगल को ध्यान में रखते हुए लगातार जांच की गई। यहां तक कि गैस विशेषज्ञ की भी सलाह ली गई । वाहनों में लगे जीपीएस सिस्टम ने इस प्रकरण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की । वाहन चालकों के पल पल की खबर इसमें रिकॉर्ड होती गई तो वहीं सीसीटीवी फुटेज ने भी पुलिस को जांच में काफी प्रमाणों के साथ सहयोग किया ।
विदित हो कि विगत् 27/4/2026 को ” आज की जनधारा ” में ” सिंघाड़ा थाना से भरी हुई कैप्सूल खाद्य विभाग को सुपूर्द नामे में दी गई ” शीर्षक से प्रकाशित समाचार में जीपीएस व सीसीटीवी की बारीकी से जांच किए जाने की बात कही गई थी साथ ही एक शासकीय कार्यवाही के दौरान जप्त गैस को एक निजी संस्थान में किसके आदेश व निर्देश पर रखा गया इस पर भी जांच की मांग की गई थी । इस ख़बर में कहा गया था कि प्रथम दृष्टया इस प्रकरण में सिंघोड़ा पुलिस की कोई संलिप्तता या भूमिका नजर नहीं आ रही है जो सच साबित हुई । वहीं सिंघोड़ा थाना में भी रखे गए कैप्सूल के निगरानी व किसी भी प्रकार की छेड़खानी न हो इस हेतु इन्हें सीसीटीवी व दो गार्डो की निगरानी में रखा गया था के जांच में कोई शिकायत यहां नहीं मिली ।
महासमुंद पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार द्वारा बताया गया कि अभी जांच चल रही है । आने वाले समय में निश्चित रूप से और अन्य लोगों के इस प्रकरण में शामिल होने व अपनी भूमिका निभाने के प्रमाण सामने आयेंगे व जांच के बाद वर्तमान में लगाई गई धाराओं में भी बढ़ोतरी होने के साथ साथ और भी लोग आरोपी बनाए जा सकते हैं ।
वहीं इस पूरी जांच व प्रकरण में सिंघाड़ा पुलिस के ऊपर गैस चोरी के मामले में किसी भी प्रकार की संलिप्तता , भूमिका व प्रमाण नहीं पाए जाने पर पुलिस ने राहत की सांस ली है । इस संबंध में सिंघोड़ा थाना के थाना प्रभारियों ने संतोष व्यक्त करते हुवे कहा कि हमने अपनी जिम्मेदारियों को पूर्णतः पारदर्शिता व कानूनी संगत रूप से निभाया है । हमें जिस स्थिति में अमानत सौंपी गई थी उसी स्थिति में अमानत को कलेक्टर के निर्देश का पालन करते हुवे वापस किया था । सीसीटीवी व गार्डों के सुरक्षा के बीच लगभग 53 हजार किलो गैस की चोरी बगैर किसी साधन व सुविधा के संभव नहीं । और यह साधन , सुविधा व उपकरण पुलिस के पास उपलब्ध नहीं होती है । जांच में सिंघोड़ा पुलिस का बेदाग निकलना हमारे लिए गर्व व विश्वसनीयता का विषय है ।