लोकतंत्र और जन-प्रतिनिधित्व की नैतिकता पर गंभीर सवाल-कोमल हुपेण्डी

गोदावरी माइंस के क्षेत्र में जो स्थितियां निर्मित हुई

भानुप्रतापपुर । विधानसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी व आदिवासी नेता कोमल हुपेण्डी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि बस्तर के पांचवी अनुसूची क्षेत्र में वर्तमान समय में जो परिस्थितियों चल रही है बेहद चिंतनीय है।
उन्होंने कहा कि संवैधानिक मूल्य बनाम कॉरपोरेट मनमानी की स्थिति निर्मित हुई है जो कि जनता की आवाज दबाने के प्रयासों से कम नहीं है।

कोमल हुपेण्डी ने कहा कि वर्तमान में गोदावरी माइंस के क्षेत्र में जो स्थितियां निर्मित हुई हैं, वे लोकतंत्र और जन-प्रतिनिधित्व की नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़ा करती हैं। एक ओर वह व्यवस्था है जो व्यावसायिक लाभ के लिए न केवल प्राकृतिक संपदा और जंगलों का अंधाधुंध दोहन कर रही है, बल्कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर डस्ट के ऊंचे ढेर खड़े कर रही है, जिससे आम नागरिको के सिर से उसकी छत तक छिन गई है।

उन्होंने कहा कि विडंबना की पराकाष्ठा यह है कि जो लोग इस पर्यावरणीय क्षति के लिए उत्तरदायी हैं, उन्हें व्यवस्था के भीतर सम्मानित किया जाता है। यह सम्मान केवल उन व्यक्तियों का नहीं, बल्कि उस सोच का प्रोत्साहन है जो लाभ को मानवीय जीवन से ऊपर मानती है।
वहीं दूसरी ओर, जब कोई स्थानीय नागरिक या सजग व्यक्तित्व इस अन्याय के विरुद्ध स्वर मुखर करता है और विस्थापित हुए परिवारों के अधिकारों की बात करता है, तो उसे सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया जाता है। स्थानीय मुद्दों को उठाने वालों के खिलाफ ‘निंदा प्रस्ताव’ लाना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि प्रभावशाली शक्तियां जनता की जायज मांग को कुचलने का प्रयास कर रही हैं। यह एक ऐसी रणनीति है जिसके तहत विरोध के हर स्वर को दबाने के लिए दंडात्मक प्रस्तावों का सहारा लिया जा रहा है, ताकि भविष्य में कोई भी कंपनी की इन अनैतिक गतिविधियों के विरुद्ध खड़े होने का साहस न कर सके।

कोमल हुपेण्डी ने कहा कि सांसद भोजराज नाग ने इस स्थिति पर गहरा क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा है कि कंपनियां अपने निजी फायदे के लिए न केवल संसाधनों का नाश कर रही हैं, बल्कि वे समाज को विभाजित करने का कार्य भी कर रही हैं। लेकिन लोगों को भ्रमित कर एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करना और जनहित की बात करने वालों को विकास में बाधक बताना कंपनी की सोची-समझी कार्यशैली का हिस्सा है। जब जंगल उजाड़े जाते हैं और कृत्रिम पहाड़ ढहते हैं, तो उसका वास्तविक दर्द उस गरीब परिवार को होता है जिसका आशियाना मलबे में दब गया, न कि उस प्रबंधन को जो केवल वित्तीय लाभ पर केंद्रित है।
स्थानीय मुद्दों को उठाने वाले व्यक्तियों को लक्षित करना दरअसल सच को दबाने का एक अनुचित प्रयास है। उन्होंने सांसद भोजराज नाग के पहल का समर्थन करते हुए कहा कि इस कठिन समय में वे उन सभी विस्थापितों और पीड़ितों के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। सांसद जी के अनुसार असली सम्मान के हकदार वे नागरिक हैं जिन्होंने अपनी संपत्ति खोई है और वह साहसी व्यक्ति है जो विपरीत परिस्थितियों में भी सत्य का साथ दे रहा है। यह संघर्ष केवल एक दुर्घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस तंत्र के विरुद्ध है जो पर्यावरण और स्थानीय निवासियों के हितों की बलि देकर अपना साम्राज्य सुरक्षित रखना चाहता है। किसी भी प्रकार का निंदा प्रस्ताव जनसेवा के प्रति उनके संकल्प को कमजोर नहीं कर सकता।
कोमल हुपेण्डी कहा कि न सिर्फ आरी डोंगरी माइंस प्रभावित क्षेत्र अपितु पूरे बस्तर संभाग में कारपोरेट की मनमानी के खिलाफ आवाज बुलंद करने की जरूरत है।

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