कृषि व्यापारियों का देशव्यापी हल्लाबोल: कांकेर जिले में ठप रहा खाद-बीज का कारोबार,दुकाने पूरी बंद,प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन।

चारामा : अनूप वर्मा

देश के लगभग 5 लाख कृषि आदान व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन ‘एग्रो इनपुट डीलर्स एसोसिएशन’ (AIDA) के आह्वान पर आज जिला कांकेर सहित पूरे देश में कृषि व्यापारियों ने अपनी मांगों को लेकर एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की।इसी क्रम में चारामा विकासखंड की भी सभी खाद बीज की दुकाने बंद रही और विरोध और अपनी मांगो के लिए खाद बीज व्यापारियों ने अपनी मांगो का हाथ में तख्ती लिए पुरे नगर में मोटरसाइकिल रैली तहसील कार्यालय तक निकालकर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौपा, वही
व्यापारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि एक महीने के भीतर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो आगामी खरीफ सीजन से पहले वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे।
​’जबरन लिंकिंग’ और कम मार्जिन से परेशान हैं व्यापारी
​कृषि आदान विक्रेता संघ, जिला कांकेर के अध्यक्ष भगवती किरी और सचिव डॉ. माखन लाल गंजीर के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में व्यापारियों ने अपनी पीड़ा व्यक्त की है। उनका कहना है कि पिछले 10 वर्षों से वे अपनी समस्याओं के समाधान की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
​व्यापारियों की 8 प्रमुख मांगें:
​जबरन लिंकिंग पर रोक: उर्वरक कंपनियां सब्सिडी वाली खाद के साथ अनुपयोगी उत्पादों को खरीदने का दबाव बनाती हैं, जिसे अपराध घोषित करने की मांग की गई है।
​ खाद की डिलीवरी सीधे डीलर के बिक्री केंद्र तक दी जाए। वर्तमान में रेल-हेड पर डिलीवरी मिलने से डीलरों को प्रति बैग ₹40-50 का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ता है।
​डीलर मार्जिन में वृद्धि: महंगाई को देखते हुए उर्वरकों पर डीलर मार्जिन को बढ़ाकर कम से कम 8% करने की मांग की गई है।
​, ग्रामीण खुदरा विक्रेताओं के लिए’ साथी ‘पोर्टल की अनिवार्यता खत्म कर इसे केवल निर्माताओं और थोक विक्रेताओं तक सीमित किया जाए।
​, यदि सीलबंद पैकिंग में नमूना फेल होता है, तो दुकानदार को अपराधी न मानकर केवल ‘गवाह’ माना जाए, क्योंकि गुणवत्ता की जिम्मेदारी निर्माता कंपनी की होती है।
​ नए बीज अधिनियम और कीटनाशक विधेयक 2025 में रिटेल डीलर को ‘प्रथम पक्ष’ बनाने वाले कठोर प्रावधानों को शिथिल किया जाए।
​PC जोड़ने की अनिवार्यता खत्म हो: कीटनाशक लाइसेंस में हर साल कंपनी का ‘प्रिंसिपल सर्टिफिकेट’ जोड़ने की बाध्यता को समाप्त किया जाए।
​दोहरी लाइसेंस प्रथा बंद हो: अनाज और बागवानी के बीजों के लिए अलग-अलग लाइसेंस की प्रक्रिया को समाप्त कर एक ही लाइसेंस की व्यवस्था लागू हो।
​खरीफ सीजन पर संकट के बादल
​व्यापारियों ने ज्ञापन के माध्यम से केंद्र सरकार को चेताया है कि यदि आगामी एक माह में इन मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे। इससे देश के कृषि उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है और किसानों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
​”हम केवल सीलबंद माल बेचते हैं, फिर भी नमूना फेल होने पर हमें अपराधी बनाया जाता है। यह अन्याय है। हम चाहते हैं कि सरकार हमारी जायज मांगों को गंभीरता से ले।”
— प्रतिनिधि मंडल, कृषि आदान विक्रेता संघ, कांकेर
​ इस दौरान संरक्षक श्री हरिलाल टांक, उपाध्यक्ष श्री चिंता राम जैन, श्री कैलाश पगारिया, श्री भूपेंद्र जैन, श्री अमल बनिक एवं संघ के अन्य सदस्य दुकानदार उपस्थित रहे।

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