रायपुर। वेदांता पावर प्लांट में तीन दिन पहले हुए हादसे को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार और प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह दुर्घटना सीधी तौर पर लापरवाही का परिणाम है और अगर उनका जांच दल मौके पर नहीं पहुंचता, तो मामले को दबाने की कोशिश हो सकती थी। कांग्रेस ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व मंत्री सत्य नारायण शर्मा सहित अन्य नेताओं के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि प्रदेश में इस तरह के औद्योगिक हादसे लगातार हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार बनने के बाद हर कुछ महीनों में बड़ी दुर्घटनाएं सामने आ रही हैं और पिछले ढाई वर्षों में 300 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
बैज ने बताया कि कांग्रेस की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर अधिकारियों और स्थानीय लोगों से बातचीत की। वहां का माहौल बेहद भयावह था और लोगों में डर साफ दिखाई दे रहा था। उन्होंने कहा कि बंद पड़े एथेनॉल प्लांट को वेदांता ने खरीदा और करीब एक साल पहले इसे दोबारा शुरू किया गया, लेकिन आवश्यक तकनीकी जांच और सुधार ठीक से नहीं किए गए।
उन्होंने दावा किया कि प्लांट में जंग लगी मशीनें और खराब उपकरण ही नजर आए, जबकि नए पार्ट्स का अभाव था। बॉयलर ब्लास्ट को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए कि कहीं प्रेशर लिमिट से अधिक संचालन तो नहीं किया जा रहा था। साथ ही वाटर लेवल इंडिकेटर की स्थिति पर भी संदेह जताया गया।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि इस हादसे में 20 लोगों की मौत के बावजूद मामूली धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है, जिससे आरोपियों को आसानी से जमानत मिल सकती है। उन्होंने मांग की कि मामले में सख्त और गैर-जमानती धाराएं लगाई जाएं तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 के तहत कार्रवाई हो।
महंत ने पूरे प्रकरण की जांच वरिष्ठ आईएएस अधिकारी से कराने और हाई कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में न्यायिक जांच की मांग भी रखी। इसके अलावा उन्होंने राज्य में बर्न यूनिट स्थापित करने की जरूरत पर जोर दिया, ताकि ऐसी घटनाओं में बेहतर इलाज संभव हो सके।
यूसीसी पर भी कांग्रेस का हमला, आदिवासी अधिकारों पर खतरे की आशंका
दीपक बैज ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में आदिवासी आबादी रहती है और यहां ग्राम सभा को विशेष अधिकार प्राप्त हैं। ऐसे में एक समान कानून लागू करने से आदिवासियों के पारंपरिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
उन्होंने आशंका जताई कि यूसीसी के जरिए आदिवासियों को मिले संवैधानिक संरक्षण कमजोर हो सकते हैं। साथ ही उन्होंने सरकार पर जल, जंगल और जमीन को उद्योगपतियों के हित में इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया।
महिला आरक्षण पर कांग्रेस का समर्थन, सरकार से स्पष्टता की मांग
महिला आरक्षण विधेयक को लेकर भी कांग्रेस ने अपनी स्थिति दोहराई। बैज ने कहा कि पार्टी हमेशा से इस बिल की समर्थक रही है। उन्होंने कहा कि जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इसे लागू किया जाना चाहिए और सरकार को इस पर स्पष्ट रोडमैप पेश करना चाहिए।