चारामा अनूप वर्मा
प्रदेश में सुशासन की सरकार मे स्वास्थ्य सेवाएँ पुरी तरह से ठप्प है। अस्पतालो में डॉक्टरों एवं अन्य कर्मचारियो की कमी से स्वास्थ्य सेवाएँ एव विभाग पुरी तरह से चरमरा गया है। छग बनने के बाद से पहली बार सुशासन की इस सरकार में अस्पतालो मे डॉक्टर नही है। स्वास्थ्य केन्द्र एक से दो डॉक्टरो के भरोसे चल रहा है और यह कोई सिर्फ चांरामा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र की बात ही है। पुरे छग के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र इन दिनों डॉक्टरो की भारी कमी से जुझ रहा है। छग के 25 वर्ष के इस सफर में अस्पतालो की ऐसी दुर्दशा कभी नही हुई।
सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र चारामा जो कि नेशनल हाईवे और विकासखण्ड का सबसे बडा अस्पताल है। जहाँ चारामा विकासखण्डे के 98 गाँव सहित धमतरी डुबान और बालोद जिले के भी कुछ गाँव ईलाज के लिए आते है। लेकिन पुरा अस्पताल एक से दो डॉक्टरों के भरोसे चल रहा है। चारामा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में बीएमओ के अतिरिक्त 07 विशेषज्ञों के पद है। लेकिन 07 में से सिर्फ 01 ही विशेषज्ञ वर्तमान में मौजूद है। 06 पद पुर्णतः रिक्त है। अस्पताल में अस्थि रोग विशेषज्ञ को छोडकर अन्य सर्जरी, मेडिसिन, स्त्री रोग, शिशु रोग, निश्चतेना और शल्य चिकित्सक के पद रिक्त है। इसके अलावा पीएससी में पदस्थ डॉक्टरो की सहायता से अस्पताल संचालित हो पा रहा है।
वर्ष 2022 में अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन लगाई गई। लेकिन उसके संचालक की भर्ती नहीं होने के कारण आज तक सोनोग्राफी की सुविधा लोगो को नही मिल पा रही है। वही इअस्पवताल में आँख नाक गले का ईलाज एमबीबीएस डॉक्टर ही संभाल रहे है। एक्सरे के संचालक डॉक्टर के सेवानिवृत्त होने के बाद से सप्ताह में 03 दिन अन्य विकासखण्ड के अस्पतालो के सचालक के माध्यम से एक्सरे की सुविधा दी जा रही है। इसके अलावा अस्पताल में कई पद रिक्त है।
जो अर्जेस्टमेंट में चल रहे है। इसके अलावा अस्पताल में विशेषज्ञ के अतिरिक्त एमबीबीएस डॉक्टरो की भी कमी है। पुरे विकासखण्ड में 07 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र है जहाँ एमबीबीएस डॉक्टर पदस्थ होने चाहिए, लेकिन कुरूंटोला को छोडकर अन्य किसी भी अस्पताल में एमबीबीएस डॉक्टर नहीं है। चारामा सामुदायिक केन्द्र में डॉक्टर नही होने के कारण कुरूंटोला के एमबीबीएस डॉक्टर चारामा में अटैच है।और सभी प्राथमिक केन्द्र आरएमए डॉक्टरो के भरोसे संचालित है। पुरे विकासखण्ड के लगभग 10 एमबीबीएम डॉक्टर होने चाहितए लेकिन सिर्फ 03 एमबीबीएस पदस्थ है। जिसमे से एक बीएमओ स्वयं है। ऐसे में आम जन को बेहतर ईलाज कैसे मिल पायेगा।
विशेषज्ञ और एमबीबीएस की कमी के कारण जो बॉडेड डॉक्टर पदस्थ होते है। वे अधिक काम के बर्डन के चलते नौकरी छोड कर चले जाते है। या कुछ डॉक्टर पीजी करने चले जाते है। यह हाल कोई चारामा विकासखण्ड का नही पुरे जिले और पुरे प्रदेश में ऐसे हालात बने हुए है। लोगो को बेहतर चिकित्स देने का दम भरने वाली सरकार की जमीनी हकीकत अलग है। आम जनता को जो सुविधाएँ मिलनी चाहिए। वह नही मिल पा रही है। छग में हर साल हजारो की संख्या में एमबीबीएस डॉक्टर पीजी करते है। और हजारो छात्र एमबीबीएस की पढाई पुर्ण करते है। लेकिन सरकार के द्वारा समय पर भर्ती प्रक्रिया नहीं किये जाने के कारण आज पुरा प्रदेश डॉक्टरो की कमी से जुझ रहा है। और स्वास्थ्य सेवाएँ चरमरा गई है।