अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या महिलाएं हनुमान जी की पूजा कर सकती हैं? शास्त्रों के अनुसार, हनुमान जी की भक्ति पर किसी का एकाधिकार नहीं है, माताएं और बहनें भी उनकी उतनी ही श्रद्धा से पूजा कर सकती हैं जितनी पुरुष। हालांकि, हनुमान जी के ‘बाल ब्रह्मचारी’ स्वरूप के सम्मान में महिलाओं के लिए कुछ विशेष नियम बनाए गए हैं।
अगर आप चाहती हैं कि आपकी पूजा का पूर्ण फल मिले और मर्यादा भी बनी रहे, तो इन बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है:
1. मूर्ति स्पर्श से बचें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी परम ब्रह्मचारी हैं। इसलिए महिलाओं को उनकी मूर्ति को स्पर्श (छूना) नहीं करना चाहिए। आप दूर से दीपक जलाकर, पुष्प अर्पित कर या हाथ जोड़कर प्रणाम करके अपनी प्रार्थना उन तक पहुँचा सकती हैं।
2. चोला चढ़ाने का नियम
हनुमान जी को सिंदूर और चमेली के तेल का चोला चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है, लेकिन यह कार्य केवल पुरुषों को ही करना चाहिए। महिलाएं हनुमान जी को चोला नहीं चढ़ा सकतीं। आप फल, मिठाई या भोग अर्पित कर अपनी श्रद्धा व्यक्त कर सकती हैं।
3. सिंदूर लगाने का सही तरीका
महिलाएं सीधे हनुमान जी के विग्रह (मूर्ति) से सिंदूर लेकर अपनी मांग में या माथे पर न लगाएं। यदि आप हनुमान जी का आशीर्वाद स्वरूप सिंदूर लगाना चाहती हैं, तो पुजारी जी के माध्यम से ही उसे प्राप्त करें।
4. मासिक धर्म के दौरान सावधानी
शास्त्रों के अनुसार, मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को मंदिर जाने या हनुमान जी की प्रत्यक्ष पूजा करने से बचना चाहिए। हालांकि, इस समय में आप मानसिक जाप (मन ही मन नाम स्मरण) कर सकती हैं, जिसे बेहद प्रभावशाली माना गया है।
5. सात्विकता का पालन
हनुमान जी की सेवा और विशेषकर मंगलवार व शनिवार के दिन खान-पान की शुद्धता बहुत जरूरी है। पूजा करने वाली महिलाओं और पुरुषों, दोनों को ही इन दिनों तामसिक भोजन (लहसुन, प्याज और मांस-मदिरा) का त्याग करना चाहिए।
निष्कर्ष: भक्ति भाव प्रधान होती है, लेकिन नियमों का पालन अनुशासन और मर्यादा का प्रतीक है। इन सरल नियमों को अपनाकर महिलाएं भी संकटमोचन की कृपा प्राप्त कर सकती हैं।