नई दिल्ली। अनुसूचित जाति (SC) के दर्जे को लेकर Supreme Court of India ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति हिंदू धर्म छोड़कर किसी अन्य धर्म, जैसे ईसाई धर्म, को अपनाता है तो उसे अनुसूचित जाति का दर्जा नहीं दिया जा सकता।
मंगलवार को जस्टिस पी. के. मिश्रा और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान मुख्य सवाल यह था कि क्या हिंदू धर्म से ईसाई धर्म में धर्मांतरण करने वाला व्यक्ति अनुसूचित जाति का दर्जा और उससे जुड़े कानूनी अधिकारों का दावा कर सकता है।
अदालत ने अपने फैसले में Andhra Pradesh High Court के आदेश को बरकरार रखा। हाईकोर्ट ने कहा था कि जो व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाता है, वह अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि धर्म परिवर्तन करने के बाद अनुसूचित जाति का दर्जा स्वतः समाप्त हो जाता है। ऐसे व्यक्ति को SC/ST (Prevention of Atrocities) Act, 1989 के तहत मिलने वाले संरक्षण का भी लाभ नहीं मिल सकेगा।
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य भी आया कि याचिकाकर्ता लगभग दस वर्षों तक ईसाई धर्म का पालन करता रहा और पादरी के रूप में चर्च में प्रार्थना सभाएं भी कराता था। इन परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि उसे अनुसूचित जाति का सदस्य मानकर SC/ST अत्याचार अधिनियम के तहत संरक्षण देना उचित नहीं होगा।
अदालत ने अपने फैसले में दोहराया कि वर्तमान कानून के अनुसार अनुसूचित जाति का दर्जा केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के अनुयायियों तक ही सीमित है।