Donald Trump Ultimatum : मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठा है और घड़ी की सुइयां एक भीषण तबाही की ओर इशारा कर रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दिया गया 48 घंटे का ‘डेडलाइन’ अब अपने आखिरी पड़ाव पर है। अगले 24 घंटे यह तय करेंगे कि दुनिया एक नए वैश्विक ऊर्जा संकट और भयंकर युद्ध में झोंकी जाएगी या कूटनीति की जीत होगी। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अगर ईरान ने तेल व्यापार के लिए जीवन रेखा माने जाने वाले ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) से अपनी नाकाबंदी नहीं हटाई, तो अमेरिकी वायुसेना ईरान के पावर प्लांट्स को मिट्टी में मिला देगी।
मंगलवार सुबह 5:14: कयामत की घड़ी?
डोनाल्ड ट्रंप के सोशल मीडिया पोस्ट और समय गणना के आधार पर, यह अल्टीमेटम भारतीय समयानुसार मंगलवार सुबह 5:14 बजे खत्म हो रहा है। ट्रंप पर घरेलू मोर्चे पर भी दबाव है, क्योंकि युद्ध के कारण वैश्विक बाजार में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं। अमेरिका का मानना है कि होर्मुज को बंद करना वैश्विक अर्थव्यवस्था पर हमला है, जिसे वह और बर्दाश्त नहीं करेगा।
ईरान की जवाबी चेतावनी: “सालों तक नहीं मिलेगी बिजली”
ईरान झुकने के मूड में नहीं दिख रहा है। ईरानी सैन्य कमान ने पलटवार करते हुए कहा है कि अगर अमेरिका ने उनके बिजली घरों को छुआ, तो होर्मुज जलडमरूमध्य को तब तक नहीं खोला जाएगा जब तक कि एक-एक प्लांट दोबारा खड़ा नहीं हो जाता। ईरानी संसद के स्पीकर ने तो यहां तक कह दिया कि अगर जंग छिड़ी, तो खाड़ी देशों के तमाम महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे उनके “वैध लक्ष्य” होंगे। यानी यह जंग सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र को अपनी लपेट में ले लेगी।
इजरायल का लेबनान प्लान: जमीनी हमले की तैयारी
एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है, वहीं इजरायल ने लेबनान को लेकर अपनी रणनीति आक्रामक कर दी है। इजरायली सेना ने लेबनान के एक प्रमुख पुल को ध्वस्त कर दिया है, जो हिजबुल्लाह की सप्लाई लाइन माना जाता था। इजरायल ने संकेत दिए हैं कि वह जल्द ही लेबनान में अपनी जमीनी सेना (Ground Operations) उतार सकता है। इजरायली नेतृत्व का मानना है कि यह लड़ाई अभी कई हफ्तों तक खिंच सकती है।
आम जनता और बुनियादी ढांचे पर संकट
इस बीच, ईरान के निर्वासित विपक्षी नेता रजा पहलवी ने अमेरिका और इजरायल से अपील की है कि वे शासन को निशाना बनाएं, लेकिन आम जनता के काम आने वाले नागरिक बुनियादी ढांचे (Civilian Infrastructure) को बख्श दें। उनका कहना है कि बिजली घरों की तबाही का खामियाजा अंततः ईरान की बेगुनाह जनता को भुगतना पड़ेगा।