मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में ईद-उल-फितर का पर्व पूरे उत्साह और भाईचारे के साथ मनाया गया। शहर की 116 मस्जिदों और ईदगाहों में विशेष नमाज अदा की गई, जहां हजारों मुस्लिम समुदाय के लोगों ने देश और दुनिया में शांति, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगी।
शहर काजी अब्दुल अजीज कादरी के मार्गदर्शन में विभिन्न स्थानों पर नमाज का आयोजन किया गया। ग्वालियर की ऐतिहासिक मोती मस्जिद, शाही जामा मस्जिद और कम्पू ईदगाह सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए।
नमाज से पहले किया गया सदका-खैरात
ईद की नमाज से पहले मुस्लिम समाज के लोगों ने जरूरतमंदों और कमजोर वर्ग के लोगों को सदका-खैरात वितरित किया। इसे इस्लाम में दान और सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
गले मिलकर दी ईद की मुबारकबाद
नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की बधाई दी। रमजान के पवित्र महीने के समापन पर मनाया जाने वाला यह त्योहार आपसी प्रेम, भाईचारे और सौहार्द का संदेश देता है।
मोती मस्जिद इंतजामिया कमेटी के सदर मोहसिन रहमान ने कहा कि इस अवसर पर सभी ने मुल्क की तरक्की और अमन-चैन के लिए दुआ की। उन्होंने वैश्विक तनावों का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी तरह का युद्ध मानवता के लिए अच्छा नहीं है और शांति ही सबसे बड़ा समाधान है।
शांति और सहअस्तित्व का संदेश
ईद-उल-फितर का पर्व यह संदेश देता है कि लोग सुकून से जिएं और दूसरों को भी जीने दें। ग्वालियर में मनाई गई ईद ने एक बार फिर सामाजिक एकता और सद्भाव की मिसाल पेश की।