नई दिल्ली। अगर आप नौकरीपेशा हैं, निवेशक हैं या अपना बिजनेस चलाते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। सरकार ने इनकम टैक्स नियम, 2026 को अधिसूचित (Notify) कर दिया है, जो 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में लागू हो जाएंगे। यह नया कानून पुराने 1961 के एक्ट की जगह लेगा और पूरी तरह से डिजिटल इकोनॉमी पर आधारित होगा।
इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य टैक्स चोरी रोकना और गणना को पूरी तरह फॉर्मूला-बेस्ड बनाना है। आइए जानते हैं वे 10 बड़े बदलाव जो आपके घर के बजट को प्रभावित करेंगे:
1. आपकी ‘टेक-होम’ सैलरी में होगा बदलाव
कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं (Perquisites) पर टैक्स के नियम अब और कड़े हो गए हैं:
- फ्री खाना: अब ऑफिस में मिलने वाला मुफ्त खाना केवल 200 रुपये प्रति मील तक ही टैक्स फ्री होगा।
- गिफ्ट: कंपनी से मिलने वाले 15,000 रुपये से ज्यादा के गिफ्ट पर अब आपको टैक्स देना होगा।
- मकान किराया (HRA): अब शहर की आबादी के आधार पर तय होगा कि आपके रेंट एलाउंस पर कितना टैक्स लगेगा।
2. डिजिटल कंपनियों पर नकेल
अब गूगल, फेसबुक जैसी विदेशी कंपनियां भारत में ऑफिस न होने पर भी टैक्स के दायरे में आएंगी। अगर किसी कंपनी के भारत में 3 लाख से ज्यादा यूजर्स हैं या उनका टर्नओवर 2 करोड़ रुपये पार करता है, तो उन्हें भारत सरकार को टैक्स देना होगा।
3. शेयर बाजार के निवेश पर सख्त नजर
शेयर बाजार के हर ट्रांजेक्शन का ऑडिट रिकॉर्ड अब 7 साल तक सुरक्षित रखा जाएगा। इससे संदिग्ध लेन-देन और टैक्स चोरी को पकड़ना आसान होगा।
4. सस्ते लोन अब पड़ेंगे महंगे
अगर आप अपनी कंपनी (Employer) से बिना ब्याज या कम ब्याज पर लोन लेते हैं, तो अब उस पर लगने वाले टैक्स की गणना SBI की ब्याज दर के आधार पर होगी। यानी कंपनी से मिलने वाला सस्ता लोन अब उतना ‘फायदेमंद’ नहीं रहेगा।
5. अनलिस्टेड शेयरों का वैल्यूएशन
अगर आप किसी ऐसी कंपनी के शेयर रखते हैं जो शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है (जैसे स्टार्टअप्स), तो अब उनका मूल्य निर्धारण (Valuation) किसी मर्चेंट बैंकर जैसे विशेषज्ञों से कराना अनिवार्य होगा।
6. ESOPs पर मिलेगी स्पष्टता
स्टार्टअप कर्मचारियों को मिलने वाले स्टॉक ऑप्शन (ESOP) पर टैक्स लगाने के नियम अब पूरी तरह साफ कर दिए गए हैं। लिस्टेड कंपनियों के लिए बाजार मूल्य और अनलिस्टेड के लिए एक्सपर्ट वैल्यूएशन ही आधार बनेगा।
7. विदेशी सौदों पर नया फॉर्मूला
भारत से जुड़ी विदेशी संपत्तियों के ट्रांसफर पर अब एक तय फॉर्मूले से टैक्स लगेगा। इससे पहले होने वाले कानूनी विवादों में कमी आएगी।
8. टैक्स अधिकारियों की बढ़ी ताकत
अगर कोई विदेशी निवासी अपनी आय का सही स्रोत या हिसाब नहीं दे पाता, तो अब टैक्स अधिकारियों को अपने विवेक और तय फॉर्मूले के आधार पर टैक्स वसूलने का अधिकार दिया गया है।
9. निवेश खर्चों पर कड़ाई
टैक्स-फ्री इनकम कमाने के लिए किए गए खर्चों पर अब सख्ती होगी। प्रत्यक्ष खर्च के साथ-साथ औसत निवेश मूल्य का 1% हिस्सा खर्चों की श्रेणी में शामिल किया जाएगा।
10. जीरो कूपन बॉन्ड (Zero Coupon Bonds)
इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग के लिए जारी होने वाले इन बॉन्ड्स के लिए अब 10 से 20 साल की मैच्योरिटी अवधि और इन्वेस्टमेंट-ग्रेड रेटिंग होना अनिवार्य कर दिया गया है।