वॉशिंगटन। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने एक बड़ा दांव खेला है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका जल्द ही समुद्र में फंसे ईरानी कच्चे तेल पर लगे प्रतिबंधों में ढील दे सकता है। इस फैसले का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की सप्लाई पर पड़ेगा, जिससे कीमतों में भारी गिरावट आने की उम्मीद है।
दरअसल, वर्तमान में लगभग 140 मिलियन बैरल ईरानी कच्चा तेल टैंकरों में फंसा हुआ है। स्कॉट बेसेंट ने एक न्यूज प्रोग्राम में बताया कि इस तेल से प्रतिबंध हटाने पर विचार किया जा रहा है ताकि ग्लोबल सप्लाई चेन को मजबूत किया जा सके। जानकारों का मानना है कि अगर यह तेल बाजार में आता है, तो अगले 10 से 14 दिनों के भीतर तेल की कीमतों में बड़ी राहत मिल सकती है। पिछले कुछ समय से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं।
सप्लाई बढ़ाने के लिए ‘प्लान-बी’ भी तैयार सिर्फ ईरान ही नहीं, अमेरिका ने हाल ही में रूसी तेल को लेकर भी इसी तरह का लचीला रुख अपनाया था, जिससे बाजार में 130 मिलियन बैरल अतिरिक्त तेल पहुंचा था। इसके अलावा, ट्रंप सरकार अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) से भी तेल निकालने की योजना बना रही है। यह कदम G7 देशों द्वारा जारी किए गए 400 मिलियन बैरल तेल के अतिरिक्त होगा।
जापान के साथ मिलकर बनेगा सुरक्षा घेरा सप्लाई सुरक्षित करने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची के बीच व्हाइट हाउस में अहम चर्चा होने वाली है। इस बातचीत का मुख्य एजेंडा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल के जहाजों को सुरक्षा प्रदान करना है। जापान भी अपने रणनीतिक भंडार से अतिरिक्त तेल जारी कर वैश्विक बाजार को स्थिर करने में मदद कर सकता है।