नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण भारत में एलपीजी आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है। हालांकि, केंद्र सरकार स्थिति को नियंत्रित करने के लिए निरंतर कदम उठा रही है। वर्तमान में घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है और आपूर्ति के दबाव को कम करने के लिए पीएनजी के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
भारत में एलपीजी आपूर्ति का संकट अब तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर गया है। देश की कुल खपत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात किया जाता है, जहाँ तनाव के कारण लॉजिस्टिक्स पर दबाव बना हुआ है। आम नागरिकों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने घरेलू श्रेणी के सिलेंडरों की निर्बाध आपूर्ति को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है।
सरकार ने परामर्श जारी किया है कि जिन क्षेत्रों में पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) का बुनियादी ढांचा उपलब्ध है, वहां उपभोक्ता एलपीजी के स्थान पर पीएनजी को अपनाएं। इससे गैस की कुल मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने में सहायता मिलेगी।
पीएनजी नेटवर्क के विस्तार को गति देने के लिए केंद्र ने राज्यों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजना तैयार की है। पीएनजी अपनाने में तेजी लाने वाले राज्यों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त कमर्शियल एलपीजी आवंटित की जाएगी। साथ ही, राज्य सरकारों से प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने और संबंधित शुल्कों में कटौती करने का आग्रह किया गया है।
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, देश में एलपीजी की उपलब्धता वर्तमान में स्थिर है और कहीं भी स्टॉक समाप्त होने जैसी स्थिति नहीं है। डिजिटल माध्यमों से बुकिंग का आंकड़ा 94 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जिससे घबराहट में की जाने वाली बुकिंग में कमी आई है। बुधवार को रिकॉर्ड 57 लाख से अधिक रिफिल बुकिंग दर्ज की गईं। इसके अतिरिक्त, पिछले दो सप्ताह के भीतर लगभग 1.25 लाख नए घरेलू और वाणिज्यिक कनेक्शन प्रदान किए गए हैं।
दूसरी ओर, कुछ क्षेत्रों से स्थानीय स्तर पर आपूर्ति में बाधा की खबरें भी प्राप्त हुई हैं। उदाहरण स्वरूप, मेरठ जिला अस्पताल में ईंधन की कमी के कारण वैकल्पिक संसाधनों के उपयोग से संबंधित मामला संज्ञान में आया है। प्रशासन इन छिटपुट समस्याओं के त्वरित समाधान के प्रयास कर रहा है।