11 सूत्रीय मांगों को लेकर फेडरेशन का हल्लाबोल, सीएम के नाम सौंपा ज्ञापन

चारामा
प्रदेश के शासकीय कर्मचारियों एवं अधिकारियों की लंबित एवं ज्वलंत मांगों के त्वरित निराकरण हेतु आज दिनांक 18 मार्च 2026 को छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के आह्वान पर पूरे प्रदेश सहित जिला कांकेर एवं विकासखंड चारामा में भी भोजनावकाश के दौरान शांतिपूर्ण एवं संगठित प्रदर्शन किया गया। यह आंदोलन फेडरेशन के चतुर्थ चरण के अंतर्गत आयोजित किया गया। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी के नाम ज्ञापन नरेन्द्र बंजारा अनुविभागीय अधिकारी चारामा को सौंपा गया। जिसमें विभिन्न विभागों—शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, पंचायत, राजस्व सहित अन्य विभागों के बड़ी संख्या में कर्मचारी एवं अधिकारी शामिल हुए।
फेडरेशन द्वारा बताया गया, कि कर्मचारियों की 11 सूत्रीय मांगों को लेकर पूर्व में भी कई चरणों में आंदोलन किए गए हैं। दिनांक 16 जुलाई 2025 को प्रथम चरण आंदोलन के दौरान तथा इसके पश्चात 22 अगस्त 2025 एवं 29 से 31 दिसंबर 2025 तक विभिन्न तिथियों में जिला कलेक्टरों के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपकर समस्याओं से अवगत कराया गया था। इसके अतिरिक्त मुख्य सचिव को पत्र क्रमांक 673 दिनांक 30/06/2025 एवं पत्र क्रमांक 738 दिनांक 01/12/2025 के माध्यम से भी विस्तारपूर्वक मांगें प्रस्तुत की गई थीं।
इसके बावजूद अब तक शासन स्तर पर किसी भी मांग का ठोस एवं संतोषजनक निराकरण नहीं किया गया है, जिससे प्रदेश के कर्मचारियों एवं अधिकारियों में गहरा आक्रोश एवं निराशा व्याप्त है।
फेडरेशन की प्रमुख 11 सूत्रीय मांगें इस प्रकार हैं- “मोदी की गारंटी” के तहत वर्ष जुलाई 2016 से लंबित महंगाई भत्ता (DA) एरियर्स की राशि कर्मचारियों के GPF खाते में समायोजित की जाए।
प्रदेश के कर्मचारियों को 8, 16, 24 एवं 32 वर्ष की सेवा पूर्ण करने पर चार स्तरीय समयमान वेतनमान प्रदान किया जाए।मध्यप्रदेश की भांति अर्जित अवकाश नगदीकरण की सीमा 300 दिवस की जाए। लिपिक, शिक्षक, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास सहित विभिन्न संवर्गों की वेतन विसंगतियों को दूर करने हेतु गठित पिंगुआ समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक कर शीघ्र निराकरण किया जाए।
शिक्षकों की प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना करते हुए समस्त सेवा लाभ प्रदान किए जाएं। सहायक शिक्षकों एवं सहायक पशु चिकित्सा अधिकारियों को त्रिस्तरीय समयमान वेतनमान का लाभ दिया जाए। अनुकंपा नियुक्ति को पूर्णतः निःशर्त लागू किया जाए तथा वर्तमान 10% सीलिंग समाप्त कर सभी रिक्त पदों पर अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जाए। पंचायत सचिवों का शासकीयकरण किया जाए तथा नगरीय निकाय कर्मचारियों को नियमित मासिक वेतन एवं समयबद्ध पदोन्नति दी जाए। विभागों में कर्मचारियों की भारी कमी को देखते हुए सेटअप का पुनरीक्षण कर सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष की जाए।
कार्यभारित, दैनिक वेतनभोगी, अनियमित एवं संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण कर उन्हें नियमित पदस्थापना में समायोजित किया जाए। आधार आधारित उपस्थिति (Attendance) प्रणाली एवं सेवानिवृत्ति उपरांत संविदा नियुक्ति को तत्काल बंद किया जाए तथा रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती की जाए।
फेडरेशन ने बताया कि यह संगठन प्रदेश के 132 मान्यता प्राप्त एवं गैर-मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों का प्रतिनिधित्व करता है, जो प्रदेश के लाखों कर्मचारियों की आवाज है।
आज के प्रदर्शन के माध्यम से फेडरेशन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि शीघ्र ही मांगों का समाधान नहीं किया गया, तो आगामी समय में आंदोलन को और अधिक उग्र एवं व्यापक स्वरूप दिया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
अंत में फेडरेशन ने जिला प्रशासन के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव से आग्रह किया है कि कर्मचारियों की न्यायोचित एवं लंबित मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार करते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लिया जाए, जिससे प्रदेश के कर्मचारियों में व्याप्त असंतोष समाप्त हो सके और प्रशासनिक कार्य सुचारू रूप से संचालित हो सके।
आज ज्ञापन सौंपने वालों कृष्ण कुमार गंजीर अध्यक्ष, तरूण देवदास, कृष्ण कुमार पम्मार, सूर्यकांत देवांगन, दिनेश साहू, संजय सिन्हा, गिरधारी सिन्हा, कमलेश गावड़े,
महिला बाल विकास विभाग से जेकब मैडम, मनोज जी, वन विभाग से सत्येंद्र कश्यप, महेश सलाम, शियन ध्रुव, संध्या सोनवानी, निर्मल नायक, सतीश नागराज, शंकर कोर्राम

और समस्त पदाधिकारी गण शामिल थे।

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