मध्य प्रदेश के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों की संपत्ति के हालिया खुलासों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सरकारी सेवा की सादगी और जमीन-जायदाद की चमक के बीच यह फासला आखिर कैसे बढ़ता जा रहा है? वर्ष 2026 में आईएएस अधिकारियों द्वारा दिए गए अचल संपत्ति विवरण में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो न सिर्फ चौंकाते हैं बल्कि प्रशासनिक तंत्र के भीतर चल रही संपत्ति की कहानी को भी उजागर करते हैं।
गुराड़ी घाट की जमीन… और 50 अफसरों का निवेश
भोपाल के कोलार क्षेत्र के गुराड़ी घाट गांव की खेती की जमीन अचानक चर्चा में आ गई है। यहां लगभग 50 आईएएस अधिकारियों ने सामूहिक रूप से कृषि भूमि में निवेश किया है।
इनमें चार मौजूदा जिला कलेक्टर भी शामिल हैं –
- अंशुल गुप्ता (विदिशा)
- जयति सिंह (बड़वानी)
- साकेत मालवीय (अशोकनगर)
- रजनी सिंह (नरसिंहपुर)
अप्रैल 2022 में खसरा नंबर 124/1/1 की यह जमीन सावित्री मारन और उनके परिवार से खरीदी गई थी।
अधिकारियों द्वारा घोषित खरीद कीमत के आधार पर इस जमीन की कुल कीमत 6 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है।
हालांकि दिलचस्प बात यह है कि अधिकारियों ने सामूहिक निवेश का जिक्र तो किया, लेकिन कुल जमीन का रकबा और कुल निवेश का स्पष्ट विवरण नहीं दिया हर अधिकारी ने सिर्फ अपने हिस्से की जानकारी ही दर्ज कराई है।
कहावत है
“जहां धुआँ उठता है, वहां आग भी कहीं न कहीं जरूर होती है।”
गुराड़ी घाट की जमीन का यह मामला भी कई सवालों की चिंगारी छोड़ रहा है।
कौन है सबसे अमीर आईएएस?
मध्य प्रदेश में 391 आईएएस अधिकारियों में सबसे अधिक संपत्ति रखने वाले अधिकारी हैं –
- मनु श्रीवास्तव
- कुल अचल संपत्ति: 19.50 करोड़ रुपए
जबकि प्रदेश के मुख्य सचिव
- अनुराग जैन
- कुल संपत्ति: 4.14 करोड़ रुपए
यानी मनु श्रीवास्तव की संपत्ति मुख्य सचिव से लगभग 4.7 गुना अधिक है।
वे अफसर जिनकी संपत्ति भी कमाई का जरिया
कुछ आईएएस अधिकारी ऐसे भी हैं जिनकी संपत्तियां नियमित आय का बड़ा स्रोत बन चुकी हैं।
- अशोक बर्णवाल
- कुल संपत्ति: 7.50 करोड़
- अचल संपत्ति से सालाना आय: 23.68 लाख रुपए
- संजय दुबे
- संपत्ति: 4.62 करोड़
- किराये से सालाना आय: 41 लाख रुपए
- नीरज मंडलोई
- संपत्ति: 5.43 करोड़
- सालाना आय: लगभग 4.5 लाख रुपए
जमीन के बादशाह भी मौजूद
भूमि के मामले में सबसे आगे हैं
- विवेक अग्रवाल
जिनके पास भटिंडा, गंगानगर, सिरसा, मुक्तसर, पंचकुला, मुल्लानपुर, इंदौर और भोपाल सहित कई जगहों पर करीब 65 एकड़ कृषि भूमि दर्ज है।
कलेक्टरों में कौन सबसे अमीर
जिला कलेक्टरों में सबसे अधिक संपत्ति वाले अधिकारी हैं
- किशोर कन्याल
जिनके पास करीब 3.18 करोड़ रुपए की संपत्ति है।
उनके पास
- दो मकान
- एक प्लॉट
- कृषि भूमि
जो भोपाल, उत्तर प्रदेश और नोएडा में स्थित हैं।
कुछ कलेक्टर ऐसे भी… जिनके पास कुछ नहीं
दिलचस्प बात यह है कि प्रदेश के 55 जिलों के कलेक्टरों में से 12 कलेक्टरों ने अपनी अचल संपत्ति ‘शून्य’ बताई है। जबकि 17 कलेक्टर ऐसे हैं जिनके पास मकान, दुकान और कृषि भूमि तीनों हैं।
एक अनोखा मामला: घट गई जमीन की कीमत
सोनिया मीणा का मामला सबसे अलग है। उन्होंने 2010 में 4.5 लाख रुपए का प्लॉट खरीदा था, लेकिन अब उसकी कीमत घटकर 1 लाख रुपए रह गई है। आमतौर पर प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ती है, लेकिन यहां 16 साल में कीमत 4.5 गुना कम हो गई।
करोड़ों की संपत्ति वाले अन्य अधिकारी
प्रदेश के कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के पास भी बड़ी संपत्ति दर्ज है, जैसे –
- राजेश राजौरा
- अनिरुद्ध मुखर्जी
- कैलाश चंद्र गुप्ता
- मनोज गोविल
- संजय शुक्ला
इनके पास देश के अलग-अलग शहरों में मकान, प्लॉट और कृषि भूमि दर्ज है।
“सरकारी नौकरी… या संपत्ति का साम्राज्य?”
आईएएस अधिकारी देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा का हिस्सा होते हैं। लेकिन जब उनके संपत्ति विवरण सामने आते हैं, तो आम लोगों के मन में कई सवाल उठते हैं –
- क्या यह सब सिर्फ निवेश और पारिवारिक संपत्ति का परिणाम है?
- या फिर प्रशासनिक ताकत के साथ आर्थिक ताकत भी बढ़ती चली जाती है?
कबीर का एक दोहा इस स्थिति पर सटीक बैठता है –
“साईं इतना दीजिए, जामे कुटुंब समाय
मैं भी भूखा न रहूं, साधु न भूखा जाय।”
लेकिन यहां तो तस्वीर कुछ और ही नजर आती है।
मध्य प्रदेश के आईएएस अधिकारियों की संपत्ति का यह खुलासा प्रशासनिक तंत्र के उस चेहरे को सामने लाता है, जहां सादगी की छवि और संपत्ति की वास्तविकता के बीच गहरी खाई दिखाई देती है।
कहावत है –
“ऊंची दुकान, फीका पकवान नहीं… बल्कि यहां तो दुकान भी ऊंची है और माल भी भारी।”
अब सवाल यही है –
क्या यह सब सिर्फ निवेश की समझ का कमाल है, या कहानी में कुछ और भी है?