शिक्षकों की पदोन्नति और परीक्षा ड्यूटी को लेकर विवाद, जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश पर शिक्षकों में नाराजगी

रायपुर। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा प्राथमिक शालाओं के 55 प्रधान पाठकों की पदोन्नति का आदेश जारी करने के बाद शिक्षा विभाग में हलचल मच गई है। विभाग ने पदोन्नत शिक्षकों को नई शाला में कार्यभार ग्रहण करने के लिए 16 मार्च की समय-सीमा तय की है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि इस तिथि तक शिक्षक नई पदस्थापना स्थल पर ज्वाइन नहीं करते हैं, तो उनकी पदोन्नति स्वतः रद्द मानी जाएगी।

इस आदेश को लेकर शिक्षकों में भारी नाराजगी है। शिक्षकों का कहना है कि वर्तमान में पांचवीं और आठवीं की बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं, जिसमें पदोन्नत होने वाले अधिकांश शिक्षकों की ड्यूटी केंद्राध्यक्ष के रूप में लगाई गई है। शिक्षकों का तर्क है कि 16 मार्च से परीक्षाएं शुरू हो रही हैं, ऐसे में यदि वे तत्काल नई शाला में ज्वाइन करते हैं, तो वर्तमान शाला में शैक्षणिक और परीक्षा संबंधी कार्यों का संचालन कौन करेगा। कई स्कूलों में पहले से ही शिक्षकों की कमी है और वहां केवल एक ही शिक्षक कार्यरत है।

शिक्षकों का मानना है कि परीक्षा के दौरान इस तरह की जल्दबाजी से व्यवस्था चरमरा सकती है। उन्होंने मांग की है कि पदोन्नति प्राप्त शिक्षकों को उनकी परीक्षा ड्यूटी पूर्ण होने के बाद नई शाला में ज्वाइन करने का अवसर दिया जाए। शिक्षकों ने इसके लिए 31 मार्च 2026 तक का समय देने की अपील की है। उनका कहना है कि पूर्व वर्षों में भी पदोन्नति के बाद कार्यभार ग्रहण करने के लिए 31 मार्च तक का समय दिया जाता रहा है, फिर इस वर्ष इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है।

इसके अलावा शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने स्वामी आत्मानंद विद्यालयों के शिक्षकों को परीक्षा ड्यूटी से मुक्त रखने पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे भेदभावपूर्ण करार देते हुए कहा कि सभी सरकारी शिक्षकों के नियम एक समान होने चाहिए। इस पूरे मामले को लेकर शिक्षक संघ के प्रतिनिधि जल्द ही कलेक्टर से मुलाकात करेंगे और पदोन्नति के बाद ज्वाइनिंग की समय-सीमा बढ़ाने की मांग करेंगे।

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