नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में छिड़े युद्ध की तपिश अब भारतीय रसोइयों तक पहुंच गई है। ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे प्रमुख समुद्री मार्गों से होने वाली एलपीजी (LPG) सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस वैश्विक संकट से निपटने के लिए भारत सरकार ने एक दशक बाद फिर से ‘मिट्टी के तेल’ यानी केरोसिन का सहारा लेने का बड़ा फैसला किया है।
आपूर्ति संकट और केरोसिन की वापसी
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। युद्ध की स्थिति के कारण गैस की आवक में आई बाधा को देखते हुए, सरकार ने राज्यों के लिए केरोसिन का अतिरिक्त कोटा जारी किया है। नियमित कोटे के ऊपर लगभग 48,000 किलोलीटर मिट्टी का तेल आवंटित किया गया है ताकि ग्रामीण और जरूरतमंद इलाकों में ईंधन की कमी न खले।
होटल और रेस्तरां को राहत
कमर्शियल गैस सिलेंडरों की किल्लत को देखते हुए सरकार ने आतिथ्य क्षेत्र (Hospitality Sector) के लिए नियमों में ढील दी है। अब होटल और रेस्तरां संचालक अगले एक महीने तक कोयला, बायोमास और आरडीएफ पेलेट जैसे वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग कर सकेंगे। पर्यावरण नियामकों ने इस आपात स्थिति को देखते हुए इसकी अस्थायी अनुमति दे दी है।
जमाखोरी रोकने के लिए बुकिंग के नए नियम
गैस की किल्लत की अफवाहों के चलते लोग घबराहट में अतिरिक्त सिलेंडर बुक कर रहे हैं। इसे नियंत्रित करने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने बुकिंग के अंतराल को बढ़ा दिया है:
ग्रामीण उपभोक्ता: अब एक सिलेंडर लेने के बाद दूसरा सिलेंडर 45 दिन बाद ही बुक कर पाएंगे (पहले यह सीमा 21 दिन थी)।
शहरी उपभोक्ता: शहरों में यह सीमा 25 दिन निर्धारित की गई है।
सरकार ने भरोसा दिलाया है कि देश में गैस का पर्याप्त भंडार है और अमेरिका, रूस तथा नॉर्वे जैसे देशों से वैकल्पिक आपूर्ति के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।