बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस एनके व्यास की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि लड़की बालिग है और उसकी सहमति से शारीरिक संबंध बने हैं, तो उसे दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। अदालत ने निचली अदालत द्वारा आरोपी को दोषी ठहराने के आदेश को अवैध करार देते हुए निरस्त कर दिया और आरोपी को बालिग होने के आधार पर बरी कर दिया।
यह मामला सरगुजा जिले के धौरपुर थाना क्षेत्र का है और करीब 20 साल पुराना है। प्रकरण के अनुसार, वर्ष 2000 में पीड़ित युवती धौरपुर में किराए के मकान में रहकर 12वीं की पढ़ाई कर रही थी। इसी दौरान उसकी जान-पहचान आरोपी लीना राम ध्रुव से हुई, जो बाद में प्रेम संबंधों में बदल गई। युवती का आरोप था कि युवक ने शादी का झांसा देकर उसके साथ करीब तीन साल तक शारीरिक संबंध बनाए। पढ़ाई पूरी होने के बाद भी दोनों के बीच मेल-मुलाकात का सिलसिला जारी रहा।
युवती के अनुसार, वह आरोपी के घर पर भी करीब एक सप्ताह तक रही थी। मई 2003 में जब उसने युवक के सामने शादी का प्रस्ताव रखा, तो कुछ समय बाद आरोपी उसे बिना बताए कहीं चला गया और वापस नहीं लौटा। इसके बाद युवती ने मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई थी। निचली अदालत ने युवक को दोषी पाया था, जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई थी।
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि दोनों बालिग थे और लंबे समय तक उनके बीच सहमति से संबंध रहे। अदालत ने कहा कि लंबे समय तक बने रहे संबंधों को सिर्फ शादी के वादे से जोड़कर दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। इस फैसले से आरोपी युवक को दो दशक बाद कानूनी राहत मिली है।