नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में ईरान और अमेरिका के बीच गहराते सैन्य संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में हलचल पैदा कर दी है। 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए इस तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में आपूर्ति बाधित होने के डर से कच्चे तेल की कीमतों ने आसमान छू लिया है। जहां एक ओर आम आदमी पर पेट्रोल-डीजल की महंगाई की मार पड़ने की आशंका है, वहीं स्मार्ट निवेशकों के लिए यह बाजार से मोटा मुनाफा कमाने का एक सुनहरा मौका बनकर उभरा है।
कीमतों में अचानक उछाल की वजह
दुनिया भर में कच्चे तेल की भारी खपत और सीमित आपूर्ति के बीच भू-राजनीतिक तनाव ने आग में घी का काम किया है। मार्च 2025 में जो कच्चा तेल 67.04 डॉलर प्रति बैरल पर था, वह मार्च 2026 में ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते 110 डॉलर प्रति बैरल के पार जा पहुंचा है। होर्मुज के रास्ते होने वाली सप्लाई रुकने के डर ने सट्टेबाजी और कीमतों को और तेज कर दिया है।
निवेश के जरिए मुनाफे के रास्ते:
ऑयल ईटीएफ (Oil ETF): तेल में निवेश करने के लिए आपको भौतिक रूप से तेल खरीदने की जरूरत नहीं है। आप ‘यूनाइटेड स्टेट्स ऑयल फंड’ (USO) जैसे ग्लोबल ईटीएफ या भारत में ओएनजीसी (ONGC) जैसी कंपनियों पर आधारित एनर्जी ईटीएफ में पैसा लगा सकते हैं। यह शेयर खरीदने जितना ही आसान और पारदर्शी है।
एनर्जी स्टॉक्स: जब भी कच्चे तेल के भाव बढ़ते हैं, तो तेल खोजने और रिफाइन करने वाली दिग्गज कंपनियों जैसे एक्सॉनमोबिल (ExxonMobil), शेवरॉन (Chevron) और बीपी (BP) को सीधा लाभ होता है। इन कंपनियों के शेयर खरीदकर आप इस तेजी का हिस्सा बन सकते हैं।
MCX ट्रेडिंग: अनुभवी ट्रेडर्स मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कच्चे तेल के फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट में ट्रेडिंग कर सकते हैं। हालांकि, इसमें जोखिम अधिक होता है और इसे व्यावसायिक आय (Business Income) की श्रेणी में रखा जाता है।
विशेषज्ञों की राय और सावधानी
स्टॉकिफाई (Stockify) के सीईओ पीयूष झुनझुनवाला के अनुसार, तेल बाजार बेहद अस्थिर होता है। इसलिए, निवेश करने से पहले ओपेक (OPEC) के फैसलों और डॉलर की मजबूती जैसे कारकों पर नजर रखनी चाहिए। विशेषज्ञों की सलाह है कि सारा पैसा एक ही जगह लगाने के बजाय पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाइड रखें और लंबी अवधि का नजरिया अपनाएं।