रायपुर ड्रग्स सिंडिकेट: ‘ड्रग्स क्वीन’ नव्या मलिक केस की परतें खोलेंगी SIT की 5 आँखें

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रायपुर ड्रग्स सिंडिकेट: ‘ड्रग्स क्वीन’ नव्या मलिक केस की परतें खोलेंगी SIT की 5 आँखें, ED भी कसेगी शिकंजा
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी को झकझोर देने वाले चर्चित नव्या मलिक MDMA ड्रग्स मामले में पुलिस ने अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाया है। इस हाईप्रोफाइल ड्रग सिंडिकेट के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए शासन ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। 5 सदस्यीय यह विशेष टीम अब न सिर्फ ड्रग्स के आने-जाने के रास्तों को तलाशेगी, बल्कि इसमें शामिल रसूखदारों और करोड़ों के मनी ट्रेल (आर्थिक लेन-देन) का भी भंडाफोड़ करेगी।

5 पुलिस अफसरों की चक्रव्यूह रचना
इस हाईप्रोफाइल मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पांच शीर्ष अधिकारियों की एक विशेष टीम (SIT) बनाई गई है। इस टीम का नेतृत्व एक सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) करेंगे, जबकि उनके साथ क्राइम ब्रांच के प्रभारी, गंज थाना प्रभारी और दो अन्य विशेषज्ञ अधिकारी शामिल रहेंगे। यह टीम सीधे तौर पर ड्रग्स के अवैध कारोबार, उसकी फंडिंग और इसके पीछे काम कर रहे पूरे आपराधिक तंत्र की जड़ों पर प्रहार करेगी।

दो चरणों में होगा इस ‘काले साम्राज्य’ का अंत
SIT ने अपनी जांच को बेहद रणनीतिक तरीके से दो हिस्सों में बांटा है:

पहला चरण (तात्कालिक फोकस): इसमें MDMA ड्रग्स के मुख्य स्रोत, सप्लाई चेन, आरोपियों की व्यक्तिगत भूमिका, ड्रग्स से कमाए गए पैसों के लेन-देन (मनी ट्रेल) और शहर की हाईप्रोफाइल पार्टियों से इसके सीधे कनेक्शन की कड़ियां जोड़ी जाएंगी।

दूसरा चरण (विस्तृत पड़ताल): इस चरण में ड्रग्स सिंडिकेट के अंतरराज्यीय (Inter-state) कनेक्शन, पर्दे के पीछे से संरक्षण देने वाले रसूखदारों, डिजिटल फॉरेंसिक और ड्रग्स खरीदने वाले रईस उपभोक्ताओं (कंज्यूमर्स) पर शिकंजा कसा जाएगा।

कैसे शुरू हुआ ‘ड्रग्स क्वीन’ के पतन का सफर
इस पूरे मामले की शुरुआत 23 अगस्त 2025 को हुई थी, जब एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और गंज थाना पुलिस ने देवेंद्र नगर ओवरब्रिज के पास एक संदिग्ध सोनेट कार को घेराबंदी करके रोका था। कार से तीन आरोपी—हर्ष आहूजा, मोनू विश्नोई (हरियाणा) और दीप धनोरिया गिरफ्तार किए गए। इनके पास से लगभग 20 लाख रुपये मूल्य की 27.58 ग्राम MDMA ड्रग्स, नगदी और मोबाइल फोन जब्त किए गए थे। इन तीनों से मिली कड़ी पूछताछ के बाद पुलिस सीधे मुंबई पहुंची और इस पूरे रैकेट की मास्टरमाइंड नव्या मलिक को धर दबोचा।

चार्जशीट में बड़े चेहरों का खुलासा
पुलिस द्वारा कोर्ट में पेश की गई चार्जशीट से साफ हुआ है कि नव्या मलिक रायपुर की बेहद निजी और महंगी हाईप्रोफाइल पार्टियों, नाइट क्लबों और टेक्नो इवेंट्स में खुद मौजूद रहकर ड्रग्स सप्लाई करती थी। पूरा नेटवर्क डिजिटल कोडवर्ड्स और मोबाइल के जरिए ऑपरेट हो रहा था। चार्जशीट में ऋषिराज टंडन और विधि अग्रवाल जैसे कई रसूखदार नामों को ड्रग्स सप्लाई करने की बात सामने आई है, वहीं मोहित ईशरानी द्वारा इस नशीले कारोबार के लिए मोटी रकम का भुगतान करने के पुख्ता सबूत मिले हैं।

SIT की रडार पर रहेंगे ये 9 मुख्य बिंदु
जांच टीम विशेष रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों पर अपनी पैनी नजर रखेगी:

मूल स्रोत: MDMA की खेप असल में किस राज्य या देश से मुंबई और रायपुर पहुंच रही थी।

सप्लाई चेन: सप्लायर से लेकर कूरियर और इसे रिसीव करने वाले स्थानीय एजेंटों का जाल।

मनी ट्रेल: बैंक खातों, यूपीआई (UPI) और नकद लेन-देन का पूरा ब्योरा।

डिजिटल सबूत: मोबाइल, लैपटॉप, व्हाट्सएप चैट और सोशल मीडिया की फॉरेंसिक जांच।

रसूखदारों का संरक्षण: क्या इस काले कारोबार को किसी प्रभावशाली राजनेता या उद्योगपति का वरदहस्त प्राप्त था।

अब ED की एंट्री से मचेगा हड़कंप
यह मामला अब सिर्फ नशीले पदार्थों की जब्ती तक सीमित नहीं रह गया है। इस ड्रग सिंडिकेट में बड़े पैमाने पर अवैध काली कमाई और मनी लॉन्ड्रिंग के इनपुट्स मिलने के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी इस मामले में अपनी स्वतंत्र जांच शुरू कर दी है। SIT की कानूनी कार्रवाई और ED के आर्थिक डंडे से अब रायपुर के ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े बड़े-बड़े सफेदपोशों की रात की नींद उड़ना तय माना जा रहा है।

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