:राजकुमार मल:
भाटापारा: हर्बल-टी पीने वालों के लिए खुशखबरी।
अब पीजिए अपराजिता के फूलों की चाय। पांच सितारा हाॅटलों में
ब्लू टी के नाम से पहचान बनाने के बाद अब यह
ब्लू टी, बड़े काॅफी और टी कार्नरों में बनने लगा है।

दूध वाली चाय, ग्रीन और ब्लेक टी खूब। चलन में है हर्बल-टी। इन सभी के बीच अब ब्लू टी की भी दस्तक हो चुकी है। पांच सितारा हाॅटलों से अब यह ब्लू टी बड़े शहरों के काॅफी और टी कार्नरों में बनाया और पीया जा रहा है। शुरुआती दौर भले ही धीमा माना जा रहा है लेकिन हर्बल-टी के शौकिनों के बीच मिल रही स्वीकार्यता बेहतर भविष्य की ओर इशारा कर रही है।
जानिए ब्लू टी को
अपराजिता के फूलों से बनता है ब्लू टी। हल्के नीले रंग के होते हैं अपराजिता के फूल। अनुसंधान में इसके फूलों में एंटी ऑक्सीडेंट्स और एंटी इंन्फ्लेमेंट्री की भरपूर मौजूदगी प्रमाणित हुई है। विशेष गुण यह कि इसमें कैफीन नहीं होती। यही तीन महत्वपूर्ण गुण अपराजिता के फूलों से बनने वाली ब्लू टी को हर्बल-टी का शानदार विकल्प बनाते हैं।

इसलिए सेहत के लिए लाभदायक
बेहतरीन डिटाॅक्स ड्रिंक माना जा रहा है ब्लू टी को, क्योंकि इसको पीने से शरीर के टाॅक्सिंस बाहर निकलता है। कैफीन की मात्रा नहीं होने की वजह से तनाव कम करता है। ब्रेन हेल्थ के लिए इसका सेवन अमृत माना जाता है क्योंकि इसमें मौजूद एंटी- ऑक्सीडेंट्स, मेमोरी और मानसिक ऊर्जा बढ़ाता है। ब्लू टी को मधुमेह रोगियों के लिए इसलिए बेहतर माना गया है क्योंकि यह शुगर की मात्रा नियंत्रण में रखता है। एंटी- इंफ्लेमेंट्री गुणों की वजह से जोड़ एवं शरीर के दर्द से राहत मिलती है।
ऐसे बनाएं ब्लू टी
अपराजिता के फूलों से ब्लू टी बनाना बेहद आसान है। एक से डेढ़ कप पानी गर्म करें। गर्म पानी में पांच से छह अपराजिता के सूखे फूल डालें। 5 से 10 मिनट तक उबालें। थोड़ा नीबू का रस और शहद मिलाएं। नीबू डालते ही तैयार टी, नीला और कुछ सेकंड बाद इसका रंग हल्का बैंगनी हो जाता है। अब तैयार है ब्लू टी पीने के लिए।

वन संपदा से स्वास्थ्यवर्धक नवाचार
अपराजिता एक आसानी से उगने वाला पौधा है, जिसके फूलों से तैयार ब्लू टी स्वास्थ्यवर्धक हर्बल पेय के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। वानिकी दृष्टि से अपराजिता की खेती कम लागत में संभव है और इसे कृषि वानिकी मॉडल में बढ़ावा देकर ग्रामीणों, महिलाओं व वनवासी समूहों को आजीविका का नया अवसर मिल सकता है। संगठित प्रसंस्करण और विपणन से ब्लू टी एक महत्वपूर्ण गैर-लकड़ी वन उत्पाद के रूप में उभर सकता है।
:अजीत विलियम्स, साइंटिस्ट (फॉरेस्ट्री), बीटीसी कॉलेज ऑफ़ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर: