Gupt Navratri Navami Puja Vidhi : आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की नवमी तिथि धार्मिक और आध्यात्मिक साधना के दृष्टिकोण से अत्यंत पवित्र और फलदायी मानी जाती है। मान्यता है कि इस पावन अवसर पर दस महाविद्याओं के साथ मां भगवती की विशेष पूजा-अर्चना करने से साधकों को मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। गुप्त नवरात्रि में भले ही तंत्र साधना को गोपनीय रखने का विधान है, लेकिन नवमी के दिन पूरे विधि-विधान से मां दुर्गा का पूजन और कन्याओं को भोजन कराने का विशेष महत्व बताया गया है।
मां दुर्गा की सरल पूजा विधि
नवमी के शुभ अवसर पर प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान ध्यान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई कर देवी दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें। मां अंबे का जल, अक्षत, रोली और फूलों से विधि-विधान से श्रृंगार करें। इसके पश्चात हवन कुंड तैयार कर मंत्रोच्चार के साथ आहुति दें। माता रानी को उनका प्रिय भोग अर्पित करें और धूप-दीप जलाकर आरती के साथ पूजा संपन्न करें।
कन्या पूजन की सही और सटीक विधि
हवन और पूजन के बाद कन्या पूजन का विधान है। इसके लिए 2 से 10 वर्ष तक की नौ कन्याओं और एक बालक को भैरव स्वरूप मानकर आदरपूर्वक आमंत्रित करें।
घर पधारने पर सबसे पहले सभी कन्याओं और बालक के पैर पखारें और उन्हें स्वच्छ आसन पर बिठाएं।
कन्याओं के माथे पर कुमकुम-अक्षत का तिलक लगाएं और हाथों में मौली बांधकर चुनरी ओढ़ाएं।
इसके बाद उन्हें पूरी, चने, हलवे, फल और खीर का सात्विक भोजन कराएं।
भोजन के उपरांत उन्हें सामर्थ्य अनुसार भेंट या दक्षिणा दें और उनके चरण स्पर्श कर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करें।