:कमल छज्ञ:
इंदिरा की समाधि ‘शक्ति स्थल’ पर रखा सीधा, मजबूत खड़ा काला पत्थर इंदिरा के व्यक्तित्व का परिचायक है। यह उनकी दृढ़हता, अडिग संकल्प, स्पष्टता और निर्भीकता का प्रतीक है। यह अति अनौपचारिक प्रथा है कि हम इंदिरा के जन्मदिन को उनकी समाधि स्थल के साथ याद कर रहे हैं, लेकिन सच भी यही है कि, इंदिरा ने अपने जीवन में अपने व्यक्तित्व की जो छाप छोड़ी वह उनके जाने के बाद भी उनकी समाधि में सजीव होकर हमारे मानस को उनके विशाल साहसिक व्यक्तित्व की ओर आकर्षित करता रहता है और उन जैसा होने को प्रेरित करता है।
‘श्रीमती इंदिरा गांधी’ ये नाम नारी शक्ति का वो नाम है जिसने सम्पूर्ण देश को विश्व पटल पर रखा। इनका जन्म 19 नवंबर 1917 को इलाहाबाद के आनंद भवन में हुआ। आप भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू एवं कमला नेहरू जी की इकलौती संतान थी। श्रीमती इंदिरा गांधी महिला शक्ति का वो जीवंत उदाहरण बनी जिसकी मिसाल आज भी बरकार है। देश ही नहीं दुनिया ने भी महिला शक्ति को उभारने वाली इंदिरा जी को अटल इरादे वाली महिला के रूप में पाया। जो ठान लिया वो किया। इन्होंने ऑक्सफ़ोर्ड में शिक्षा ली लेकिन जमीन से जुड़ी एक ऐसी राजनेता बनी जिनको आज भी हिंदुस्तान याद करता है। यह भारत की आवाज बनी, महिलाओं की आवाज बनी देश की। पहली महिला प्रधानमंत्री बनी, और ऐसे फैसले लिए जो एक कर्मठ राजनेता के साहस और कौशल को दर्शाता है।

1971 की विजय और बांग्लादेश निर्माण ने उन्हें वैश्विक स्तर पर मजबूत और निर्णायक नेतृत्व का प्रतीक बनाया। गुटनिरपेक्ष
आंदोलन में उनका प्रभाव उन्हें दुनिया की विकासशील देशों का प्रवक्ता बना दिया। टाइम मैगज़ीन ने उन्हें ‘वुमेन ऑफ द इयर 1972’ घोषित किया। देश में हरित क्रांति लाने, बैंकों का राष्ट्रीयकरण करने जैसे अनेकों फैसले ने देश को विकास के पथ पर लाने की दिशा में उनकी चिंता और प्रयास को बखूबी दर्शाता है। इन्होंने जीवन में बहुत कुछ झेला भी।
असमय बेटे की मौत पर भी तटस्थ रही। इंदिरा गांधी के व्यक्तित्व के लिए सागरिका घोष अपनी किताब ‘इंदिरा : इंडियाज मोस्ट पावरफुल प्राइम मिनिस्टर’ में लिखती हैं-इंदिरा ‘दुर्गा जैसी शक्तिशाली स्त्री’ रही हैं वह एक ऐसी सशक्त राजनेता के रूप में देखी जा सकती हैं जिसने भारत को सैन्य जीत, आर्थिक बदलाव और राजनीतिक निर्णायक कदमों के माध्यम से नेतृत्व दिया। उन्होंने लिखा कि वह बाहर से जितनी कठोर दिखाई पड़ती थी, अंदर से उतनी ही सरल और संवेदनशील थीं।
महिला होने के बावजूद यह देश में एक शासक के रूप में देश संभाल रही थी। आपने अपने जीवन और राजनीति में लगातार तूफानों से संघर्ष किया, परंतु कभी झुकी नहीं। उनके लोहे जैसे संकल्प, स्थिर नेतृत्व और आत्मबल ने देश तो क्या दुनिया की राजनिति में उन्हें एक मजबूत नेता के रूप में अपना लोहा मनवाया। उनके जीवन में सरलता थी पर निर्णय में हिचकिचाहट नहीं थी।
उनका आत्मविश्वास, अनुशासन और उनकी राजनीतिक बुद्धिमता उनकी पहचान थी। आम लोगों से जुड़ने की कला और कठिन परिस्थितियों को नेतृत्व में बदल देना उनमें सहज था। सच का इंदिरा जी व्यक्तित्व एक स्त्री के रूप में हम महिलाओं को बहुत कुछ सीखा गया। आपकी वो हल्के रंग की साड़ी पर लंबा जैकेट, और आत्मविश्वास से उठते हुए कदम हर महिला के लिये प्रेरणा बने। अंत में यही कहूंगी कि मैं उसकी तारीफ क्या करूं, जिसे खुद तारीफ ने ही चुना है। आज भी हिंदुस्तान आप पर गर्व करता है।
लेखिका महिला कांग्रेस जगदलपुर की पूर्व जिला अध्यक्ष हैं।