रायपुर। गर्मी की तपिश बढ़ने के साथ ही राजधानी रायपुर के बड़े हिस्से में पानी की किल्लत शुरू हो गई है। शहर के कुल 70 वार्डों में से 35 वार्ड ऐसे हैं जहां लोगों को बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। इस गंभीर समस्या पर महापौर मीनल चौबे ने स्वीकार किया है कि जल स्रोत सूख रहे हैं और बढ़ती जनसंख्या के दबाव के कारण जलापूर्ति प्रभावित हो रही है। फिलहाल नगर निगम के पास टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाना ही एकमात्र विकल्प बचा है।
टैंकरों के लिए बजट में भारी बढ़ोतरी
महापौर ने बताया कि जिन इलाकों में पानी की भारी किल्लत है, वहां टैंकर भेजे जा रहे हैं। इस साल टैंकरों के लिए 1 करोड़ 50 लाख रुपये का टेंडर किया गया है, जबकि पिछले साल यह राशि 1 करोड़ रुपये थी। जल आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जल बोर्ड का गठन भी किया गया है। हालांकि, जमीनी स्तर पर टैंकरों की संख्या मांग के मुकाबले कम बताई जा रही है, जिससे कई कॉलोनियों में हाहाकार मचा हुआ है।
वाटर हार्वेस्टिंग को लेकर उठ रहे सवाल
शहर में गिरते भूजल स्तर और वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की विफलता पर महापौर ने कहा कि निगम के दसों जोन में वाटर हार्वेस्टिंग के नाम पर करोड़ों रुपये जमा थे। कई मकानों में यह सिस्टम नहीं लग पाने के कारण उस राशि को राजसात किया गया है। अब निगम प्रशासन इस राशि का उपयोग ठेकेदारों के माध्यम से घरों में हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाने के लिए करेगा। गौरतलब है कि पिछले दो वर्षों से प्रशासन इसी योजना का दावा कर रहा है, लेकिन धरातल पर अब तक कोई ठोस काम नजर नहीं आया है।
जनता पर असर
रायपुर के कई बाहरी वार्डों में स्थिति ज्यादा खराब है। लोग सुबह से ही नगर निगम के टैंकरों का इंतजार करने को मजबूर हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक वर्षा जल संचयन और पाइपलाइन विस्तार पर गंभीरता से काम नहीं होगा, तब तक हर साल रायपुर वासियों को इसी तरह की किल्लत झेलनी पड़ेगी।