मध्यप्रदेश में कल से गेहूं खरीदी के लिए स्लॉट बुकिंग शुरू, 10 अप्रैल से केंद्रों पर पहुंचेगा अनाज

भोपाल। मध्यप्रदेश में रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की सरकारी खरीदी (उपार्जन) की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों के बाद प्रशासन ने कमर कस ली है। प्रदेश में कल यानी 7 अप्रैल से पंजीकृत किसान अपनी सुविधा के अनुसार उपार्जन केंद्रों पर फसल लाने के लिए स्लॉट बुकिंग कर सकेंगे।

दो चरणों में होगी खरीदी: संभागवार कार्यक्रम जारी

प्रदेश में गेहूं खरीदी का काम दो चरणों में शुरू किया जाएगा। पहले चरण में 10 अप्रैल से इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग के जिलों में खरीदी शुरू होगी। वहीं, प्रदेश के अन्य सभी संभागों में 15 अप्रैल से गेहूं उपार्जन का कार्य प्रारंभ किया जाएगा। इस वर्ष गेहूं बेचने के लिए प्रदेश भर के 19 लाख 4 हजार 644 किसानों ने अपना पंजीयन कराया है।

78 लाख मीट्रिक टन उपार्जन का लक्ष्य

सरकार ने इस साल प्रदेश में लगभग 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का अनुमान लगाया है। इसके लिए पूरे प्रदेश में 3,627 उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं। खरीदी प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए करीब 3 लाख 12 हजार गठान बारदानों (जूट की बोरियां) की आवश्यकता होगी। प्रशासन का दावा है कि बारदानों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और अतिरिक्त खरीदी की प्रक्रिया भी तेजी से जारी है।

मुख्यमंत्री के निर्देश: केंद्रों पर न लगें लंबी कतारें

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उपार्जन केंद्रों पर किसानों को किसी भी तरह की असुविधा न हो। केंद्रों पर बिजली, पीने का पानी, बैठने की व्यवस्था, छाया और प्रसाधन जैसी बुनियादी सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा है कि तौल कांटों का गहन निरीक्षण किया जाए ताकि किसानों के मन में कोई संशय न रहे। साथ ही, फसल तुलाई के बाद किसानों के खातों में भुगतान प्रक्रिया भी जल्द से जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

सियासी घमासान: कमलनाथ ने साधा निशाना

एक तरफ सरकार खरीदी की तैयारियों का दावा कर रही है, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। कमलनाथ ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मध्यप्रदेश के किसानों पर ‘चौतरफा मार’ पड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि फसल तैयार होने के बावजूद सरकार बारदाने की कमी का बहाना बनाकर देरी से खरीदी शुरू कर रही है। कमलनाथ ने ओलावृष्टि से हुए नुकसान का मुद्दा उठाते हुए कहा कि किसान संकट में है और सरकार की व्यवस्थाएं नाकाफी हैं।

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