Singer Babita Goti Interview : सुरों के सफर में बबीता गोटी – बस्तर से बड़े पर्दे तक की कहानी

Singer Babita Goti Interview : सुरों के सफर में बबीता गोटी – बस्तर से बड़े पर्दे तक की कहानी

Singer Babita Goti Interview : छत्तीसगढ़ी संगीत जगत में इन दिनों एक नई आवाज गूंज रही है। कांकेर जिले के छोटे से गांव चौगेल की रहने वाली सुश्री बबीता गोटी ने अपनी मेहनत और सुरीली आवाज के दम पर छत्तीसगढ़ी फिल्म जगत में कदम रखा है। फिल्म ‘धनेश की आराधना’ के जरिए उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। पेश है उनसे हुई बातचीत के कुछ अंश:

सवाल: बबीता जी, सबसे पहले हमें अपने प्रारंभिक जीवन और शिक्षा के बारे में बताएं?

जवाब: मेरा जन्म और पालन-पोषण ग्राम चौगेल में हुआ। मेरी शुरुआती शिक्षा मुल्ला में हुई, जिसके बाद मैंने भानुप्रतापपुर से अपनी हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी की पढ़ाई पूरी की। कॉलेज की शिक्षा मैंने कांकेर से प्राप्त की। लेकिन संगीत के प्रति मेरा झुकाव बचपन से ही था, इसलिए मैंने चंडीगढ़ संगीत विश्वविद्यालय से संगीत की विधिवत शिक्षा ली।

सवाल: गायकी के क्षेत्र में आने की प्रेरणा आपको कहां से मिली?

जवाब: मेरे घर में ही संगीत का माहौल था। मुझे गाने की प्रेरणा मेरे पिता स्वर्गीय श्री मथुरा प्रसाद जी, मेरी माता श्रीमती देवकी गोटी और मेरी दादी दसाय बाई से मिली। दादा जी श्री जग्गू सिंह गोटी का आशीर्वाद भी हमेशा साथ रहा। स्कूल के दिनों से ही मुझे गाने का शौक था, जहाँ शिक्षकों और दोस्तों ने मुझे हमेशा प्रोत्साहित किया।

सवाल: आपकी पहली फिल्म ‘धनेश की आराधना’ के बारे में कुछ बताएं। इसमें आपके कौन से गीत हैं?

जवाब: यह फिल्म मेरे लिए बहुत खास है। इसमें मैंने कुल 5 गीत गाए हैं, जिन्हें दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है। प्रमुख गीतों के बोल हैं:

देखथ रथों तोर रद्दा

सुन मोरे सजना

नदिया के पानी

मोला रे संगी लागत हावे

कहा उड़ागे रे ए मोर मैना इन सभी गानों की रिकॉर्डिंग रायपुर के श्रेष्ठ स्टूडियो में की गई है।

सवाल: फिल्म के गानों की शूटिंग किन-किन लोकेशन्स पर हुई है?

जवाब: गानों की शूटिंग के लिए छत्तीसगढ़ की बहुत ही खूबसूरत जगहों को चुना गया था। हमने संबलपुर, भीरागांव, बोगर, हाटकोंदल और पीछे कट्टा जलाशय के सुंदर नजारों के बीच गानों को फिल्माया है।

सवाल: इस फिल्म तक पहुंचने का सफर कैसा रहा? किसे इसका श्रेय देना चाहेंगी?

जवाब: मुझे फिल्म में गाने का अवसर ‘एन माही यूट्यूब चैनल’ के माध्यम से मिला। इस मुकाम तक पहुंचने में मोहित साहू सर और प्रणव झा सर की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके मार्गदर्शन के बिना यह संभव नहीं होता। साथ ही, मेरे परिवार का सपोर्ट मेरी सबसे बड़ी ताकत रहा है।

सवाल: भविष्य को लेकर आपकी क्या योजनाएं हैं?

जवाब: संगीत ही मेरा जीवन है। मैं भविष्य में भी इसी क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहती हूँ और छत्तीसगढ़ी कला एवं संस्कृति को अपनी आवाज के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुँचाना चाहती हूँ।

सवाल: संगीत की दुनिया में कदम रखते समय क्या आपको किसी तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा?

जवाब: एक छोटे से गाँव चौगेल से निकलकर रायपुर के बड़े स्टूडियो तक पहुँचना आसान नहीं था। शुरुआत में झिझक थी, लेकिन जब चंडीगढ़ से संगीत की शिक्षा ली, तो आत्मविश्वास बढ़ा। मेरे परिवार, खासकर माता-पिता के दृढ़ विश्वास ने हर बाधा को छोटा कर दिया।

सवाल: रायपुर के श्रेष्ठ स्टूडियो में रिकॉर्डिंग की, वह अनुभव कैसा था?

जवाब: वह अनुभव अद्भुत था। एक पेशेवर स्टूडियो में माइक के सामने खड़े होकर गाना और तकनीक को समझना रोमांचक था। वहाँ के माहौल ने मुझे एक कलाकार के रूप में खुद को और बेहतर ढंग से निखारने में मदद की।

सवाल: ‘धनेश की आराधना’ के गानों में आपका सबसे पसंदीदा गाना कौन सा है और क्यों?

जवाब: वैसे तो पाँचों गाने मेरे दिल के करीब हैं, लेकिन “देखथ रथों तोर रद्दा” गाते समय मुझे एक अलग ही सुकून महसूस हुआ। इसके शब्द और धुन बहुत ही मर्मस्पर्शी हैं।

निष्कर्ष: बबीता गोटी की यह यात्रा उन सभी ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो बड़े सपने देखते हैं। उम्मीद है कि उनकी आवाज छत्तीसगढ़ी सिनेमा को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।

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