सिवनी
मध्य प्रदेश के सिवनी जिले से किसानों और आम जनता के लिए एक बेहद गर्व की बात सामने आई है। सिवनी के मशहूर जम्बो सीताफल को अब भारत सरकार की तरफ से जीआई टैग मिल गया है। जीआई टैग का सीधा मतलब होता है जियोग्राफिकल इंडिकेशन यानी भौगोलिक संकेतक। यह एक तरह का सरकारी प्रमाण पत्र होता है जो किसी खास इलाके की विशेष चीज को उसकी शुद्धता और विशिष्टता के लिए दिया जाता है। इस बड़ी कामयाबी से सिवनी के सीताफल को अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में एक नया नाम मिलेगा। साथ ही इलाके के किसानों को अपनी फसल की बहुत अच्छी कीमत मिल सकेगी।
एक फल का वजन एक किलो तक, कम बीज और ज्यादा गूदा
सिवनी का यह खास सीताफल अपने बड़े आकार, लाजवाब क्वालिटी और एकदम प्राकृतिक मिठास के लिए जाना जाता है। आम तौर पर इस सीताफल का वजन 200 ग्राम से लेकर 650 ग्राम तक होता है। कमाल की बात यह है कि जिले के भूतबंधानी इलाके में पैदा होने वाले कुछ सीताफलों का वजन 800 ग्राम से लेकर पूरे एक किलोग्राम तक पहुंच जाता है। इस फल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें बेहद कम बीज होते हैं। इसके अंदर का सफेद गूदा बहुत गाढ़ा और प्राकृतिक रूप से शहद जैसा मीठा होता है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बाजारों में इस फल की मांग हमेशा बहुत ज्यादा रहती है।
सेहत का खजाना है यह फल, अब नकली नाम पर लगेगी रोक
यह जम्बो सीताफल सिर्फ स्वाद में ही नंबर वन नहीं है, बल्कि सेहत के लिए भी एक बड़ा खजाना है। इस फल के अंदर भरपूर मात्रा में पोटैशियम, मैग्नीशियम और जरूरी विटामिंस पाए जाते हैं। ये सभी तत्व हमारे दिल को मजबूत रखने और ब्लड प्रेशर यानी खून के दबाव को नॉर्मल रखने में बहुत मदद करते हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जीआई टैग मिलने के बाद अब कोई भी दूसरा दुकानदार या शहर नकली तरीके से सिवनी के नाम का इस्तेमाल करके अपना सीताफल नहीं बेच पाएगा। इससे फल की साख बची रहेगी और सिवनी के स्थानीय किसानों की आमदनी में भारी मुनाफा होगा।