सक्ती के सीएमएचओ कार्यालय पर सूचना छिपाने का आरोप, 48 दिन बाद भी नहीं दिया जवाब

सरकारी अस्पताल के स्टोर में बड़ी मात्रा में कालातीत एवं अतिरिक्त दवाइयों के पाए जाने का मामला

सक्ती। सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 की समयबद्ध व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला जिला सक्ती से सामने आया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय, सक्ती को भेजे गए सूचना के अधिकार आवेदन पर 48 दिन बीत जाने के बाद भी न तो कोई जवाबी पत्र जारी किया गया है और न ही मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराई गई है। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, जांजगीर निवासी पत्रकार राजेन्द्र कुमार राठौर ने 8 जून 2026 को भारतीय डाक के पंजीकृत माध्यम से सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 6(1) के अंतर्गत आवेदन भेजा था। आवेदन में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सक्ती द्वारा आदेश क्रमांक क/जांच/2025/369 दिनांक 12 सितंबर 2025 के तहत गठित जांच दल से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेजों की मांग की गई थी। यह जांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सक्ती के स्टोर में कालातीत (एक्सपायर्ड) एवं आवश्यकता से अधिक मात्रा में पाई गई दवाइयों एवं स्वास्थ्य सामग्रियों के संबंध में कराई गई थी।

इन दस्तावेजों की मांगी थी जानकारी

आवेदन में जांच दल द्वारा प्रस्तुत संपूर्ण जांच प्रतिवेदन, जांच के दौरान संकलित दस्तावेज, निरीक्षण पंचनामा, जांच निष्कर्ष, दोष निर्धारित किए जाने संबंधी अभिमत एवं सक्षम प्राधिकारी द्वारा की गई अंतिम कार्रवाई एवं आदेश की सत्यापित प्रतियां मांगी गई थीं। आवेदन के साथ नियमानुसार 10 रुपए का भारतीय पोस्टल ऑर्डर भी संलग्न किया गया था।

30 दिन में सूचना देना है अनिवार्य

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 7(1) के अनुसार, किसी भी लोक सूचना अधिकारी को आवेदन प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर सूचना उपलब्ध कराना अथवा कारण सहित अस्वीकृति का आदेश जारी करना अनिवार्य है। यदि आवेदन किसी अन्य कार्यालय से संबंधित हो तो धारा 6(3) के तहत पांच दिनों के भीतर संबंधित लोक प्राधिकारी को स्थानांतरित करना भी अनिवार्य है। इसके बावजूद 48 दिन बीत जाने के बाद भी आवेदक को न सूचना मिली और न ही किसी प्रकार का लिखित उत्तर प्राप्त हुआ है।

जांच रिपोर्ट पर पर्दा डालने की आशंका

जिस जांच से संबंधित दस्तावेज मांगे गए हैं, वह सरकारी अस्पताल के स्टोर में बड़ी मात्रा में कालातीत एवं अतिरिक्त दवाइयों के पाए जाने जैसे गंभीर विषय से जुड़ी है। ऐसे में सूचना उपलब्ध नहीं कराए जाने से यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या जांच प्रतिवेदन को सार्वजनिक करने से बचने का प्रयास किया जा रहा है, अथवा संबंधित अधिकारियों द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।

आयोग तक पहुंच सकता है मामला

यदि निर्धारित अवधि में सूचना उपलब्ध नहीं कराई जाती है तो आवेदक को सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 19 के अंतर्गत प्रथम अपील तथा उसके बाद राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील या शिकायत प्रस्तुत करने का अधिकार प्राप्त है। अधिनियम में बिना उचित कारण सूचना रोकने पर संबंधित लोक सूचना अधिकारी के विरुद्ध आर्थिक दंड का भी प्रावधान है।

जनसूचना अधिकारी पर उठ रहे हैं कई सवाल

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय, सक्ती के जनसूचना अधिकारी की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि 30 दिन की वैधानिक समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी जवाब क्यों नहीं दिया गया? वहीं क्या जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने से बचा जा रहा है? क्या सूचना के अधिकार अधिनियम के प्रावधानों की अनदेखी की जा रही है? संबंधित लोक सूचना अधिकारी की जवाबदेही आखिर तय कब होगी?

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