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Sadhvi Ritambhara साध्वी ऋतंभरा ने किया रुक्मणी कृष्ण मंगल का सरस वर्णन

Sadhvi Ritambhara

Sadhvi Ritambhara साध्वी ऋतंभरा ने किया रुक्मणी कृष्ण मंगल का सरस वर्णन

Sadhvi Ritambhara सक्ती । नगर में मछरौलीया गोयल परिवार द्वारा आयोजित विशाल श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के व्यासपीठ से अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचिका साध्वी ऋतंभरा जी के द्वारा रुक्मणी कृष्ण मंगल का सरस वर्णन कराया गया । उन्होंने बताया कि रुकमणी जी तो साक्षात लक्ष्मी जी के अंश से ही राजा विश मक्की पुत्री बनी थी , जो भगवान द्वारिकाधीश श्री कृष्ण जी की सुंदरता उनके विशिष्ट गुणों को जानकर मन से ही अपने पति के रूप में वर्ण कर चुकी थी ।

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Sadhvi Ritambhara कुण्डिनपुर के राजा भीष्मा की पुत्री राजकुमारी रुकमणी ने जाना कि मेरा विवाह शिशुपाल के साथ किया जाना सुनिश्चित हो रहा है , तब वह भगवान कृष्ण को 7 पंक्तियों का एक पत्र लिखकर मन की बात कहती है जिसे भगवान श्रीकृष्ण ने पढ़कर रुकमणी का हरण कर लिया और द्वारिका पुरी में बड़े आनंद के साथ रुक्मणी और श्री कृष्ण जी का ब्याह संपन्न हुआ , यही रुक्मणी भगवान श्री कृष्ण की प्रथम पटरानी बनी ।


Sadhvi Ritambhara साध्वी ऋतंभरा जी ने बताया कि भगवान श्री कृष्ण मथुरा में रहकर प्रजा की सेवा और धर्म का पालन करने लगे तभी जरासंध ने यदुवंशियों को अपना शत्रु मानकर 17 बार आक्रमण किया था l श्री कृष्णा ने बार-बार यदुवंशियों पर हो रहे आक्रमण से उनकी रक्षा करने के लिए विशाल समुद्र के बीचो-बीच 12 योजन अर्थात 48 कोस की एक भव्य किला जैसे महानगर का निर्माण विश्वकर्मा जी से करवा कर सभी यदुवंशियों को इसी नई द्वारिकापुरी में सुरक्षित रखा ।

Sadhvi Ritambhara  18वीं बार जरासंध और कालयवन इन दोनों ने मिलकर फिर से आक्रमण किया तब भगवान श्रीकृष्ण ने राजा मुचकुंद को माध्यम बनाकर उसके नेत्रों की अग्नि से कालयवन को भस्म करवा दिया । इस धरा पर अवतार लेने पर भगवान भी अपने अवतार लेने के हेतु पर विचार करते हैं कि मेरा अवतार तो इस धरती से अधर्म का भार उतारने और पापियों के नाश करने के लिए हुआ है ।

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Sadhvi Ritambhara  यही प्रत्येक मनुष्यों को भी अपने जन्म लेने का हेतु अर्थात उद्देश्य निश्चित करना ही चाहिए , जीवन का लक्ष्य सुनिश्चित करना अति अनिवार्य है , तभी मनुष्य जीवन धन्य होता है । साध्वी जी के द्वारा अपने उद्बोधन में हिंदुत्व के प्रति स्वाभिमान और राष्ट्र के प्रति धर्म का पालन करने प्रेरणा प्रदान की गई ।

गोपी उद्धव संवाद स की कथा में भ्रमरगीत प्रसंग और गोपियों के बिरह की कथा का आनंद एवं संकीर्तन का लाभ आज कथा के छठवें दिन हजारों श्रद्धालु भक्तगण श्रोताओं को प्राप्त हुआ । भागवत कथा दीदी रितंभरा देवी जी के भागवत कथा महोत्सव होने से सक्ती नगर का वातावरण धर्ममय हो गया है कथा के छठवें दिन कथा श्रवण करने के लिए पूर्व जांजगीर लोकसभा सांसद कमला देवी पाटले भाजपा नेता अमर सुल्तानिया पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष रामअवतार अग्रवाल पूर्व मंडी अध्यक्ष देवेंद्र नाथ अग्निहोत्री ओमप्रकाश राठौर सहीत नगर के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्र के महिला पुरुष भक्तगण ने कथा का रसपान किया

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