रायपुर, 19 जनवरी 2026. प्रवर्तन निदेशालय (ED) रायपुर जोनल ऑफिस ने मेसर्स मोक्शित कॉर्पोरेशन के पार्टनर शशांक चोपड़ा को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत 14 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSCL) और डायरेक्टरेट ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DHS) में मेडिकल इक्विपमेंट तथा री-एजेंट खरीद घोटाले के मामले में की गई है।
15 जनवरी को आरोपी को स्पेशल कोर्ट (PMLA), रायपुर के समक्ष पेश किया गया। कोर्ट ने ED को 19 जनवरी 2026 तक चार दिन की कस्टडी प्रदान की है। यह कार्रवाई ACB/EOW, रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर और चार्जशीट के आधार पर की गई है।
ED की जांच में पता चला कि शशांक चोपड़ा ने CGMSCL और DHS के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर किया। आरोपी ने मांग को गलत बताकर अत्यधिक कीमत पर मेडिकल उपकरण और री-एजेंट सप्लाई कराए, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ और आरोपी तथा उसके साथियों को गैर-कानूनी लाभ मिला।
जांच में यह भी सामने आया कि अपराध से अर्जित धन (प्रॉसीड्स ऑफ क्राइम) को छिपाने के लिए आरोपी ने कई फर्जी कंपनियां बनाईं। प्रशिक्षण और मेंटेनेंस सर्विस के नाम पर फर्जी एग्रीमेंट किए गए। बाद में बड़ी रकम कैश में निकाली गई, जिसका इस्तेमाल संपत्ति खरीदने और निजी लाभ के लिए किया गया।
इससे पहले PMLA की धारा 17 के तहत आरोपी और उसके साथियों से जुड़े कई स्थानों पर सर्च और सीज कार्रवाई की गई थी। जांच में 43 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति – बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉजिट, शेयर और वाहन – जब्त/फ्रीज की गई। कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस भी बरामद हुए, जो मनी लॉन्ड्रिंग के लेयरिंग और छिपाने के पैटर्न को साबित करते हैं।
ED ने कहा कि यह कार्रवाई सरकारी धन की सुरक्षा और वित्तीय अनुशासन लागू करने के उद्देश्य से की गई है। जांच जारी है और मामले में अन्य संलिप्त व्यक्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ED की यह त्वरित कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग के अन्य मामलों में सख्त संदेश देगी।