दिलीप गुप्ता
सरायपाली :- अनेक शासकीय शिक्षकों द्वारा शासकीय कार्य मे रहते हुए
अन्य व्यवसायों में लिप्त पाये गए हैं । अभी तक सरायपाली विकासखंड में
2 शिक्षकों पर कार्यवाही की गई है तो वही एक शिक्षक के खिलाफ
जांच प्रारम्भ नही हुई है । कुछ दिनों पूर्व प्रभारी प्राचार्य रूपानंद पटेल को
इसी कारणों से निलम्बित किया गया तो वही डुमरपाली शासकीय
शिक्षक जितेंद्र साहू के खिलाफ भी शिकायत की गई है ।

पूर्व में बस्ती सरायपाली में पदस्थ शिक्षक राजेश प्रधान पर चल रही जांच का परिणाम आ गया है शिकायत की जांच के बाद जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा कार्यवाही करतें हुवे 2 वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने की कार्यवाही की गई हैं । वही जांच अधिकारियों द्वारा जांच को लेकर अनेक प्रश्न खड़े हो गये हैं । जांच अधिकारियों द्वारा ऐसा लगता है जैसे जांच के नाम पर लीपा पोती कर दी गई है । शिकायतकर्ता द्वारा इसके खिलाफ उच्च अधिकारियो को शिकायत किये जाने की बात कही गई है ।
इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी विजय कुमार लहरे द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि
बस्त्ति सरायपाली में पदस्थ सहायक शिक्षक राजेश प्रधान के व्दारा शासकीय कर्मचारी होकर हर्बल लाइफ प्रोडक्ट का व्यापार व प्रचार के विरुद्ध की गई शिकायत पर जिला शिक्षा अधिकारी महासमुन्द (छ.ग.) के पत्र क्रमांक/4149/शिकायत/जांच/2025 महासमुन्द दिनांक 01/08/2025 के अनुसार जांच दल गठित किया गया, जिसमें प्रकाशचंद मांझी ( विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी ), सतीश पटेल ( विकासखण्ड स्त्रोत समन्यवक ) , जितेन्द्र रावल ( व्याख्याता शासकीय हाईस्कूल बाराडोली )दवात जांच कर जांच प्रतिवेदन के अनुसार राजेश प्रधान, सहायक शिक्षक द्वारा नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी के उत्पादों के उपयोग के साथ-साथ कंपनी का प्रचार-प्रसार करना प्रतीत होना पाया गया। फलस्वरूप अनुशासनात्मक कार्यवाही की अनुशंसा की गई है।

राजेश प्रधान सहायक शिक्षक से आरोप के सम्बन्ध मे राजेश प्रधान नोटरी से शपथ पत्र सत्यापित कराकर दिनाक 18/08/2025 अनुसार इस कार्यालय में दिनांक 03/09/2025 को प्रस्तुत किया गया। जिसके अनुसार उनके मोबाईल नम्बर 8770812080 का उपयोग उनकी भतीजी कु. भाग्यश्री द्वारा किया जाता है। उक्त राजेश प्रधान के भतीजी व्दारा उक्त पोस्ट अनजाने में किया गया। उक्त जांच प्रतिवेदन के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी महासमुन्द (छ.ग.) व्दारा राजेश प्रधान के जानकारी एवं स्वीकृति में किए पोस्ट मानते हुए दो वार्षिक वेतन-वृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकें जाने हेतु आदेश जारी किया गया है।
जिला शिक्षा अधिकारी महासमुन्द के इस हुए कार्यवाही आदेश में अनेक प्रश्न चिन्ह खड़े हो गए। जैसे शपथ पत्र में जब यह स्वीकार किया गया है कि आरोपी की भतीजी कु.भाग्यश्री उक्त हर्बल लाइफ कंपनी में कार्यरत है तथा आरोपी स्वयं इस प्रोडक्ट का सेवन करता है तब जांच अधिकारियो द्वारा भतीजी का बयान क्यों नही लिया गया ?
जब जांच कमेटी अपना जांच प्रतिवेदन कार्यालय कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी महासमुन्द (छ.ग.) को दिनांक 16/08/2025 को भेज चुकी है तो उसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी के व्दारा राजेश प्रधान का शपथ पत्र 03/09/2025 को स्वीकार क्यों किया गया यह संदेह के दायरे में आता है ? क्या उक्त शपथपत्र को जांच के दौरान जांच दल के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए था ?
क्या राजेश प्रधान के द्वारा दिया गया शपथपत्र पूर्णतः सहीं है इसकी भी सत्यता की जांच होनी चाहिये । राजेश प्रधान के व्दारा शपथपत्र में बताया गया कि उसका भतीजी ने अनजाने में पोस्ट किया गया, राजेश प्रधान के नाम से बने सोशल मीडिया एकाउंट फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब चैनल पर अनेक हर्बल लाइफ प्रोडक्ट प्रचार-प्रसार के पोस्ट थे क्या इतना पोस्ट सब अनजाने में किया जाना संभव है वह भी तब जब उसकी भतीजी स्वयं हर्बल कंपनी में कार्यरत है । चाहती तो वह भी अपने मोबाइल से प्रचार प्रसार कर सकती थी पर जानबूझकर राजेश प्रधान द्वारा कंपनी के प्रचार प्रसार के लिए अपनी भतीजी के व्यवसाय को बढ़ाने व आर्थिक लाभ हेतु उसे सहयोग ( भतीजी को )किये जाने हेतु स्वयं का मोबाइल व अपने से सम्बंधित सोशल मीडिया का उपयोग करने दिया गया । वहीं राजेश प्रधान के द्वारा प्रस्तुत शपथपत्र में अपना नम्बर भतीजी को चलाना बताया गया है, इस बात का क्या प्रमाण है कि उसका मोबाइल या सीम उसकी भतीजी ही चला रहीं थीं जबकि वह पहले से से ही कंपनी में कार्यरत है ।
कुछ और मुद्दों है जिन पर जांच अधिकारियों व जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जांच व बयान नही लिया गया ।इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार मामले को सस्ते में निपटाए जाने हेतु राजनैतिक दबाव भी बनाया गया संभवत इसी के परिणाम स्वरूप कमजोर कार्यवाही की गई ।
वहीं इस संबंध में सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि जांच दल द्वारा जब आरोपी से पूछताछ करने गए तो उसे समय की फोटो सभी की खींचकर उसे सोशल मीडिया में वायरल भी किया गया था । जो नियमतः गलत है ।
इस कार्यवाही के सम्बन्ध में शिकायतकर्ता अभिनय ने बताया कि इस कार्यवाही से वह संतुष्ट नही है । डीईओ द्वारा की गई कार्यवाही में आरोपी के प्रति सहानुभूति का भाव दिखाया गया है । इसकी शिकायत सभी दास्तवेजो के साथ उच्च अधिकारियों से किये जाने की बात कही गई है ।